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एशिया और लेटिन अमेरिकी देश खींच रहे हैं आर्थिक वृद्धि की गाड़ी

आर्थिक संकट की मार से उबरने के प्रयास में लगी दुनिया में फिलहाल एशिया और लेटिन अमेरिकी देश ही आर्थिक वृद्धि की गाडी को आगे खींच रहे हैं और इस साल समूचे एशिया क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 8 प्रतिशत और लेटिन अमेरिकी देशों में 5 प्रतिशत रहने की भविष्यवाणी की गई है।
   
व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (अंकटाड) की 2010 की आज जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, चीन, सहित एशिया और लेटिन अमेरिकी क्षेत्र के देश बड़े बाहरी घाटे को दूर रखने में कामयाब रहे हैं और आर्थिक संकट शुरु होने से पहले ही इन देशों ने काफी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा भंडार भी जुटा लिया था। इससे वैश्विक संकट के समय ये देश बेरोजगारी पर अंकुश रखने और घरेलू मांग में तीव्र सुधार हासिल करने में कामयाब रहे।
   
रिपोर्ट कहती है कि इन विकासशील देशों में कारोबार और व्यापार की स्थिति संकट से पहले के स्तर पर वापस आ गई है और इसे देखते हुये एशिया क्षेत्र में इस वर्ष आर्थिक वृद्धि 8 प्रतिशत रहने की भविष्यवाणी की गई है। रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट करते हुये जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय की प्रोफेसर जयती घोष ने कहा वैश्विक आर्थिक संकट अभी पूरी तरह से टला नहीं है और ऐसे में हमें अपनी नीतियों को घरेलू मांग बढ़ाने और रोजगार सृजन पर केन्द्रित करना चाहिये।
   
आर्थिक वृद्धि के बारे में पूछे गये एक सवाल पर जयती ने कहा कि भारत में 8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि हासिल होगी लेकिन जहां तक संकट से पूरी तरह उबरने की बात है ऐसी स्थिति अभी नहीं बनी है। वेतन भत्तों में कटौती अभी भी बरकरार है और रोजगार सजन उतनी तेजी से नहीं हो रहा है जितना कि वैश्विक संकट से पहले हो रहा था।

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  • Web Title:आर्थिक वृद्धि में एशिया और लेटिन अमेरिकी देश आगे