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करियर के माथे पर हिन्दी की बिंदी

कविता, कहानी और कथा वाचन की दुनिया से निकल कर हिन्दी रोजगार की शक्ल में ढल रही है। सरकारी दफ्तरों के बाबुओं से लेकर निजी कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर्स तक को रोजगार और कारोबार को विस्तार देने के लिए हिन्दी की जरूरत पड़ रही है। नयी प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने और उसे आम लोगों के बीच जमाने के लिए हिन्दी अब कॉरपोरेट जगत के लिए हथियार बन चुकी है। रोजगार के क्षेत्र में हिन्दी के इसी विस्तार पर आनंद कुमार की रिपोर्ट।

कल तक तकनीक के क्षेत्र में अंग्रेजी का बोलबाला था, पर अब हिन्दी भी इसमें अपनी पैठ बना रही है। कंपनियों का विज्ञापन हो या बैकिंग सेवा का विस्तार, इनका हिन्दी के बिना काम नहीं चल पा रहा। आर्थिक विकास की ओबाहवा में हिन्दी को सहभागी बनाना एक अनिवार्य कदम बन गया है। उदारीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में कारोबार के विस्तार और विकास ने हिन्दी जानने वालों के लिए रोजगार के कई नए अवसर पैदा किए हैं। इस भाषा पर पकड़ रखने वाले लोगों को आज सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में अपने पैर मजबूती से जमाने का मौका मिल रहा है।

हिन्दी में रोजगार की दुनिया विविध और बहुरंगी है। इसमें करियर बनाने की चाह रखने वालों के लिए यह जरूरी है कि इसे जानें और क्षेत्र विशेष में पेशेवर रुख अपना कर आगे बढ़ें।

अध्यापन

अध्यापन के क्षेत्र में नर्सरी से लेकर स्कूल और कॉलेज तक ही नहीं, कोचिंग सेंटर्स तक में हिन्दी के जानकारों के लिए ढेरों अवसर हैं। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी हिन्दी एक विषय के रूप में जारी है। इसे पढ़ाने के लिए ऐसे शिक्षकों की जरूरत है, जिन्होंने इस विषय के साथ टीचर ट्रेनिंग भी की हो। चाहे वह नर्सरी टीचर ट्रेनिंग हो, जूनियर बेसिक टीचर ट्रेनिंग, बीएड और एमएड। नए और पुराने, दोनों तरह के कॉलेजों में हिन्दी का अध्यापन चल रहा है। इस माध्यम से नए-नए कोर्स खुल रहे हैं। कोचिंग संस्थानों में भी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में हिन्दी पेपरों की तैयारी करवाने के लिए ट्य़ूटर व टीचर रखे जाते हैं।

विदेशों में हिन्दी अध्यापन

वैश्वीकरण के दौर में भारत की बहुरंगी संस्कृति को जानने की ललक ने विदेशियों में हिन्दी सीखने का क्रेज पैदा किया है। संस्कृति के अलावा जो विदेशी कंपनियां भारत में अपने बाजार और कारोबार का विस्तार चाहती हैं, वे भी अपने कर्मचारियों को हिन्दी सीखने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित कर रही हैं। इस रूप में इंग्लैंड, अमेरिका, जापान, जर्मनी, रूस, चीन और कोरिया जैसे कई देशों में हिन्दी पढ़ने-पढ़ाने का काम चल पड़ा है। यहां पैठ रखने वाले भारतीयों को इसके जरिए रोजगार मिल रहा है।

बैकिंग सेवा

देश में निजी और सरकारी बैंकों ने हाल के वर्षों में अपने कारोबार में बेतहाशा बढ़ोत्तरी की है। जगह-जगह बैकिंग सेवा के विस्तार ने हिन्दी में दक्ष युवाओं को भी रोजगार प्रदान किया है। यहां संस्थान की पत्रिका का प्रकाशन हो या बैकिंग सेवा के बारे में हिन्दी भाषी जनता को जानकारी देने का, दोनों के लिए विशेष तौर पर हिन्दी अधिकारी और कर्मचारी रखे जा रहे हैं। प्रबंधकों को भी जनता से बेहतर संपर्क कायम करने के लिए हिन्दी में निपुण बनाया जा रहा है।

प्रकाशन संस्थान

देश में प्रकाशन उद्योग का धंधा विकास की नई सीढ़ियों पर चढ़ रहा है। इन उद्योगों का एक बड़ा कारोबार हिन्दी पट्टी से भी जुड़ा है। पारंपरिक प्रकाशन संस्थान अपने कारोबार को नित नए आयाम दे रहे हैं। इनके अलावा हिन्दी के बाजार में अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्थान भी अपने पैर जमा रहे हैं, चाहे वह पेंग्विन हो या हॉपर कॉलिन्स। इस उद्योग में हिन्दी संपादक और अनुवादक की आज अच्छी-खासी जरूरत है। विदेशी भाषाओं की किताबें भी इन प्रकाशन संस्थानों से हिन्दी माध्यम में अनूदित होकर आ रही हैं।

सिविल सर्विस

राज्य स्तरीय सिविल सर्विस परीक्षा हो या केन्द्र स्तर पर, इनमें अब हिन्दी माध्यम के छात्र भी अच्छी-खासी संख्या में बुलंदी के शिखर पर पहुंच रहे हैं। 2009 में छत्तीसगढ़ की किरण कौशल ने जहां हिन्दी माध्यम से सिविल सर्विस परीक्षा में तीसरा रैंक हासिल किया, वहीं 2010 के रिजल्ट में जयप्रकाश मौर्य ने नौवां रैंक। रिजल्ट में टॉप टेन में हिन्दी वालों को पहले से ज्यादा तवज्जो मिल रही है। इस आबोहवा के कारण हिन्दी माध्यम से और हिन्दी को एक विषय के रूप में चुन कर सैकड़ों युवा राज्य और केन्द्र की सिविल सर्विस परीक्षा में आ रहे हैं। सिविल सर्विस परीक्षा में परीक्षार्थियों की उमड़ी भीड़ को देखते हुए दिल्ली, इलाहाबाद और पटना जैसी जगहों पर कई कोचिंग संस्थान भी उग आए हैं। हिन्दी में स्टडी मैटीरियल तैयार कराने से लेकर पढ़ाने तक का कारोबार करोड़ों रुपयों में पहुंच गया है।

पब्लिक रिलेशन

नगरों और महानगरों में आज पीआर कंपनियां भी अपने कारोबार स्थापित कर रही हैं। इन कंपनियों में बेहतर हिन्दी के साथ लैस युवाओं की खासी जरूरत है।

ये युवा संस्थान के कारोबार को मीडिया के माध्यम से कायम करते हैं। कई बार सीधे-सीधे लोगों के बीच भी किसी कंपनी की छवि और उसके उत्पाद को प्रचारित करते हैं। रोजगार का यह नया क्षेत्र दिनोदिन खूब बढ़ रहा है।

मैनेजमेंट

अंग्रेजी में एमबीए कराने और इससे जुड़े संस्थान चलाने के कारोबार में हिन्दी ने भी अपनी दस्तक दी है। जिस तरह अंग्रेजी चैनलों की दुनिया में हिन्दी चैनलों ने अपनी जगह बनाई, उसी तरह हिन्दी माध्यम से एमबीए भी अपनी जगह बना रहा है। बाजार में ऐसे प्रशिक्षित प्रबंधकों को पैदा करने के लिए ही महात्मा गांधी हिन्दी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय ने हिन्दी माध्यम में एमबीए का कोर्स शुरू किया है। विश्वविद्यालय यह कोर्स देशभर में विभिन्न सेंटरों के माध्यम से चला रहा है।

अनुवाद

अनुवाद के क्षेत्र में हिन्दी दिन दुगनी रात चौगुनी के लिहाज से बढ़ रही है। निजी और सरकारी, दोनों तरह के संस्थानों में अनुवादकों की जरूरत पड़ रही है। इसके लिए आउटसोर्सिंग का काम भी जोरों पर है। अनुवाद ब्यूरो इन जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थापित हुए हैं। भारत सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अनुवाद ब्यूरो बनाने की योजना बनाई है। कर्मचारी चयन आयोग सरकारी कार्यालयों में अनुवादकों की मांग को देखते हुए हर साल परीक्षा भी आयोजित करता है। इसमें जूनियर और वरिष्ठ, दोनों तरह के अनुवादक चयनित होते हैं। अनुवाद के साथ दुभाषिया भी रखे जा रहे हैं। विदेशी फिल्मों की हिन्दी में डबिंग हो या संसद में अंग्रेजी भाषा से हिन्दी में रूपांतरण या विदेश शिष्टमंडल की भाषा का हिन्दी में रुपांतरण, इन सभी कामों के लिए दुभाषियों की जरूरत होती है। दुभाषिए को रोजगार के अलग से अवसर भी मिल रहे हैं।

राजभाषा संस्थान

केन्द्र स्तर पर राजभाषा के रूप में हिन्दी को बढ़ावा देने और उसके प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा संस्थान में भी हिन्दी से जुड़े लोगों को काम के अवसर मिल रहे हैं। यहां राजभाषा अधिकारी, हिन्दी सहायक व हिन्दी टाइपिस्ट जैसे पदों पर काम करने के अवसर मुहैया कराए जाते हैं।

मीडिया

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, दोनों के अभूतपूर्व विस्तार ने रोजगार के ढेरों अवसर मुहैया कराए हैं। दोनों में संपादन और लेखन का काम प्रमुख है। इस उद्योग का विस्तार भी जारी है। एफएम रेडियो, कम्युनिटी रेडियो और इंटरनेट मीडिया के नए क्षेत्र हैं, जहां आए दिन कंटेन्ट तैयार करने और स्क्रिप्ट लेखन का काम प्रमुखता से होता है। मीडिया संस्थानों में पत्रकारिता पढ़ाने और उसके लिए सामग्री तैयार करने का काम भी तेजी से बढ़ा है। 

विज्ञापन उद्योग

हिन्दी में आकर्षक और प्रभावी विज्ञापन तैयार करने के लिए युवाओं की मांग बढ़ी है। प्रसून जोशी जैसे कई लेखकों ने विज्ञापन की दुनिया में एक अलग पहचान कायम की है। इंटरनेट पर कंटेन्ट राइटिंग और अनुवाद के लिए भी हिन्दी के विशेषज्ञों और भाषाविदों की जरूरत बढ़ाई है।

भाषा विशेषज्ञ

विभिन्न सॉफ्टवेयर कंपनियां हिन्दी में लोकप्रियता हासिल करने के लिए भाषाविदों को अपने यहां अवसर मुहैया करा रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, आईबीएम, क्वॉर्क एक्सप्रेस जैसे नाम प्रमुख हैं। गूगल और याहू जैसी कंपनियां अपने यहां स्तरीय सामग्री उपलब्ध कराने के लिए हिन्दी भाषाविदों को काम के अवसर मुहैया करा रही हैं।

स्क्रिप्ट और कंटेन्ट लेखन

टीवी सीरियल हो फिल्म की दुनिया, विज्ञापन संस्थाएं, कोचिंग सेंटर, प्रकाशन संस्थान या अन्य निजी कंपनियां, अपने यहां स्क्रिप्ट लेखन और कंटेन्ट राइटिंग के लिए हिन्दी के लेखकों को ढेरों अवसर मुहैया करा रही हैं। बॉलीवुड में इन दिनों स्क्रिप्ट लेखकों की अच्छी-खासी मांग है।

कॉल सेंटर

बाजार पर पकड़ बनाने के लिए अब कॉल सेंटरों में भी अच्छी हिन्दी जानने और बोलने वालों को काम के अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं। रोजगार का यह क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

निजी क्षेत्रों में बढ़ रहा है हिन्दी का दखल
प्रो. हरिमोहन शर्मा, साउथ कैम्पस, दिल्ली विवि.

भारत में हिन्दी आधी से ज्यादा आबादी की भाषा है। उच्च मध्यवर्ग में अंग्रेजी भले ही बोली जाती हो, लेकिन ज्यादातर लोग हिन्दी ही बोलते और समझते हैं। इन लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट, दोनों मीडिया हिन्दी की राह चल रहे हैं। आए दिन क्षेत्रीय अखबार और नए-नए चैनल खुल रहे हैं। उनमें विज्ञापन भी हिन्दी में ही आ रहे हैं। इसमें हिन्दी के विशेषज्ञों की मांग है। इतनी बड़ी आबादी से जुड़े बाजार में व्यवसाय के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियां अपने अधिकारियों को हिन्दी सिखाने पर जोर दे रही हैं। सरकारी क्षेत्र में हिन्दी के लिए रोजगार के अवसर पहले से ही हैं, लेकिन निजी क्षेत्रों में अब इसका विस्तार कई रूपों में हुआ है। तकनीक और अनुवाद के क्षेत्र में हिन्दी के लिए बहुत सारे अवसर पैदा हुए हैं।

निजी बैंकों में भी बन रहे हैं हिन्दी विभाग
प्रदीप अग्रवाल, डीजीएम, आईडीबीआई बैंक

आज बैंक का क्षेत्र हो या मनोरंजन का, तकनीक का क्षेत्र हो या विज्ञापन का, रोजगार के लिहाज से हिन्दी हर जगह अपनी पैठ बना रही है। सरकारी बैंकों के अलावा निजी बैंक भी अब अपने यहां अलग से हिन्दी विभाग स्थापित कर रहे हैं। यहां ऐसे अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जो बैंक में हिन्दी माध्यम से बिजनेस को बढ़ावा दे सकें। समाज के निचले स्तर तक के लोगों के बीच पहुंचने के लिए बैंक हिन्दी को खासा तवज्जो दे रहे हैं। इन लोगों के बीच कारोबार करने, उनकी संवेदनाओं को छूने के लिए विज्ञापन का सहारा ले रहे हैं। तकनीक में भी हिन्दी आ गई है। सीडैक की मदद से यूनिकोड के आने से कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करना आसान हो गया है। इससे पहले ज्यादातर तकनीकी काम अंग्रेजी में ही हो रहा था। बैंक अपने यहां नेट बैकिंग को भी हिन्दी में विकसित कर रहे हैं। आक्रामक मार्केटिंग के लिए विज्ञापन में हिन्दी का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। मनोरंजन उद्योग की ओर देखें तो हॉलीवुड की फिल्मों को हिन्दी में डबिंग करने का काम तेजी से बढ़ा है। नेशनल जियोग्राफिक, डिस्कवरी और इस तरह के कई और चैनल हिन्दी में कार्यक्रम लेकर आ रहे हैं। इसने अनुवादकों और दुभाषियों को काम के नए अवसर दिए हैं। अगर इस क्षेत्र में कारोबार और करियर की दृष्टि से कोई लगन के साथ काम करता है तो वह अंग्रेजी वालों की तरह की मेहनताना पाता है।

ज्ञान के उत्पादन से नए अवसर
प्रो. अशोक चक्रधर, कवि और लेखक

आज संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र से आगे निकलकर हिन्दी ज्ञानोत्पादन के क्षेत्र में बढ़ रही है। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में हिन्दी लेखन ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। आने वाले समय में इसे और बढ़ावा देने की जरूरत है। हिन्दी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी बढ़ रही है। यूनिकोड के आने से अब हिन्दी में टाइप करना आसान हो गया है। इससे हिन्दी से जुड़े लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। मीडिया के क्षेत्र में देखें तो तरह-तरह के चैनल हिन्दी के जानकारों के लिए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। हिन्दी पत्रकारिता ने हिन्दी के कारोबार को अच्छा-खासा बढ़ावा दिया है। आने वाले समय में हिन्दी को वैश्विक भाषा बनाने की दिशा में और काम करने की जरूरत है।

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