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दयनीय लोकतंत्र, गया-गुजरा मतदाता

कुछ बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेज इतने क्रूर थे कि उनके गोदामों में अनाज भरा रहता था, परंतु उसे खरीदने की कुव्वत न होने के कारण जनता भूख से तड़प-तड़प कर मर जाती थी। हमारे केंद्रीय कृषि तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री अंग्रेजों से ज्यादा अलग नहीं हैं, जिनके पास अनाज इतना है कि गोदाम कम पड़ गए हैं, पर वह उसे देश की गरीब जनता को भी नहीं बांटेंगे। अंग्रेज तो पराए थे, निरंकुश थे, लेकिन हमारे खाद्य मंत्री और प्रधानमंत्री तो अपने हैं। हमने ही उन्हें चुना और कुर्सी पर बैठाया है। विडंबना देखिए, लोकतंत्र का चौकीदार उसके वास्तविक मालिक को भूखों मार रहा है। कैसा दयनीय हमारा लोकतंत्र और गया-गुजरा मतदाता है।
ठाकुर सोहन सिंह भदौरिया, बीकानेर, राजस्थान

वीआईपी पार्किग
दिल्ली हाईकोर्ट ने वाहनों की भीड़ कम करने के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर स्थित वीआईपी पार्किग के लिए 60 रुपये प्रति घंटे के शुल्क को सही ठहराया है। साफ है, इससे स्टेशन पर वाहनों का दबाव कम होगा। यह कहने की जरूरत नहीं है कि दिल्ली में एक यात्री को विदा करने के लिए अनेक रिश्तेदार स्टेशन पहुंच जाते हैं। अब जब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मेट्रो की सुविधा मौजूद है, तो लोगों को उसका लाभ उठाना चाहिए और स्टेशन पर अनावश्यक कार ले जाने से बचना चाहिए।
राजेंद्र कुमार सिंह, एच-101, आर्य अपार्टमेंट, सेक्टर-15, रोहिणी, दिल्ली

वहां क्या भैंस बंधेगी
स्टेडियम बनकर हुए अरबों में तैयार
आफ्टर कॉमनवेल्थ के क्या होगा भरतार
वहां क्या भैंस बंधेगी?
अशोक शर्मा, दिल्ली

हालात कब सुधरेंगे?
महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत गांवों का देश है और गांवों में देश के अन्नदाता रहते हैं। इसलिए उसकी तस्वीर सुधारे बिना देश की तस्वीर नहीं बदलेगी। आजादी के छह दशकों के  बाद भी हालात कमोबेश वैसे ही हैं। भारतीय फिल्मकारों ने भारतीय कृषकों और ग्रामीण परिवेश का ईमानदारी से चित्रण किया है। 1957 में ‘मदर इंडिया’ में महबूब खान ने सूदखोर लाला के जरिये भारतीय किसानों की वेदना को संजीदगी के साथ पर्दे पर अंकित किया। अभी हाल में अनुष्का रिजवी और आमिर खान द्वारा बनाई गई फिल्म ‘पीपली लाइव’ में भी बदहाल किसानों की आत्महत्या की समस्या को उजागर करने का प्रयास किया गया, पर सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी। यह वही देश है, जहां विधायक-सांसद अपने वेतन तिगुना कर लेना चाहते हैं, किंतु किसानों व जवानों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं दिखाते। यहां जवान वन रैंक-वन पेंशन की मांग लेकर अपने पदक तक वापस कर चुके हैं। किंतु यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर हालात कब सुधरेंगे?
शक्तिवीर सिंह ‘स्वतंत्र’, जामिया मिल्लिया विवि, दिल्ली

नहीं बदलेगा चीन
विश्व में शांति और भाईचारा कायम करने के उद्देश्य से भारत ने पंचशील का सिद्धांत दिया था, जिसका सभी ने स्वागत किया, परंतु पड़ोसी चीन इसकी अवहेलना कर भारत को अपमानित करने का प्रयास करता रहा। आज भी वह कभी अरुणाचल प्रदेश को अपना क्षेत्र बताता है, तो कभी कश्मीरियों को वीजा नहीं देता है। ताजा मामला एक सैन्य अधिकारी को इस आधार पर वीजा नहीं देने का है कि वह अधिकारी कश्मीर में तैनात है। साफ है, चीन विवाद और कटुता फैलाने में यकीन रखता है। इसके उलट भारत सारे विवाद भुलाकर दोस्ती का हाथ बढ़ाता रहा है। इसी उद्देश्य से वर्ष 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने चीन का ऐतिहासिक दौरा किया था। बाद की सरकारों ने भी रिश्तों में गरमाहट लाने का प्रयास किया, परंतु चीन अपनी विवादास्पद हरकतों और बेतुकी बातों से इस पर पानी फेरता रहा। अब तो वह भारत में ही नहीं, विश्व में भी घटिया सोच वाला देश बन गया है।
पवन कुमार झा, शालीमार बाग, दिल्ली

राहुल को मंत्री बनाएं
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पिछले कई वर्षो से देश के विभिन्न प्रदेशों में जाकर वहां के निवासियों के दुख-दर्द जानने की कोशिश कर रहे हैं तथा वह अपने मिशन में कामयाब भी हो रहे हैं। अब उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में यथोचित स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि सरकार उनके अनुभवों का लाभ उठा सके और राहुल भी जनसेवा का अपना वचन अधिक प्रभावी तरीके से पूरा कर सकें। राहुल गांधी युवा हैं तथा निर्भीकतापूर्वक अपने कर्तव्यों को अंजाम दे रहे हैं। अत: उन्हें मंत्री अवश्य बनाया जाना चाहिए।
सत्यपाल शर्मा, शालीमार बाग, दिल्ली

भारत-पाक लें सबक
इजरायल-फलस्तीन के बीच शान्ति हेतु सीधी बातचीत का समाचार पढ़ कर बड़ी प्रसन्नता हुई। यह सार्थक हो जाए तो दुनिया के लिए यह प्रसन्नता का सबसे बड़ा विषय होगा। संभवत: भारत-पाकिस्तान भी इससे कुछ सबक लेंगे। दुनिया की 90 प्रतिशत आबादी यही चाहती है कि दुनिया ग्लोबल विलेज न सही कम से कम तनावमुक्त तो हो। दुनिया की अधिकांश आबादी जानती है कि अधिकांश देश सैन्य क्षेत्रों में अपार धन खर्च करते हैं। यही धन विकास के लिए खर्च किया जाए तो दुनिया से गरीबी का उन्मूलन हो जाएगा।
मुकेश कौशल, रुड़की

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