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प्रबंध समिति के चुनाव को चुनौती देने का हक सदस्य को नहीं

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा है कि शिक्षण संस्थाओं की प्रबंध समिति की मान्यता व चुनाव को याचिका के माध्यम से चुनौती देने का अधिकार उसके सदस्य को नहीं है। न्यायालय ने कहा कि समिति के सदस्य को चाहिए कि वह अपने अधिकारों के लिए दीवानी मुकदमा दाखिल करे। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी एवं न्यायमूर्ति काशीनाथ पाण्डेय की खण्डपीठ ने बुलंदशहर के डीआर इंटर कॉलेज गोठनी की प्रबंध समिति के आजीवन सदस्य राजवीर सिंह की ओर से दाखिल विशेष अपील को खारिज करते हुए दिया है।


न्यायालय ने कहा कि यदि आजीवन सदस्य के अधिकार प्रभावित न हो रहे हों तो उसे भी प्रबंध समिति के चुनाव को याचिका के माध्यम से चुनौती देने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं की प्रबंध समितियों के चुनाव को लेकर हर साल हजारों याचिकाएं दायर होती हैं और एक न्यायपीठ विधि के महत्वपूर्ण मुद्दों को निस्तारित करने की जगह प्रबंध समितियों के विवाद निपटाने में अपना कीमती समय दे रही है। जबकि इनमें कई ऐसे मामले होते हैं, जिसमें बिना चुनावी बैठक बुलाए कागजी कार्रवाई कर ली जाती है और यह सब स्कूल को मिल रहे सरकारी धन पर अपना अधिकार जमाने के लिए किया जाता है। न्यायालय ने कहा कि चुनाव से प्रभावित सदस्य को पहले अपनी आपत्ति शिक्षा अधिकारियों के समक्ष दर्ज करानी चाहिए। उसके बाद ही उसे याचिका दाखिल करनी चाहिए। यह भी कहा कि चुनाव से जिन सदस्यों के अधिकार प्रभावित नहीं होते, उन्हें चुनाव को चुनौती देने की इजाजत दी गई तो मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी।

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