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फिर वही खाना

वह खाना खाने बैठे ही थे कि उनके दोस्त चले आए। खाने की मेज सज गई थी। उसे देख कर दोस्त ने कहा, ‘यार, ये तुम क्या खा रहे हो? तुम्हें भी खाने की वैरायटी से चिढ़ है। वही-वही खाना खाते रहते हो।’

न्यूट्रीशनिस्ट कॉनर मिडलमैन व्हिटनी का कहना है कि सेहतमंद रहने के लिए मेरा एक ही मंत्र है वैरायटी, वैरायटी और वैरायटी। खाने में वैरायटी बहुत जरूरी है। हमारा शरीर एक तरह के खाने को पसंद नहीं करता। जब हम अलग-अलग तरह की चीजें खाते हैं, तो शरीर पर अच्छा असर पड़ता है। जाहिर है उससे बीमारियां दूर भागती हैं।

कई स्टडी का हवाला देते हुए कॉनर कहती हैं कि बेहतर खाने की वैरायटी से कैंसर तक का खतरा कम हो जाता है। बेहतर से उनका मतलब उस खाने से है, जो बहुत आसानी से पच जाता है। असल में भारी भरकम खाना खाने से कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। हमारे दुरुस्त रहने में इसी पाचन की बड़ी भूमिका होती है।

हमें हर रोज तय करके कुछ हरी-हरी चीजें खानी चाहिए। डॉक्टर मानते हैं कि कम से कम पांच बार कुछ हरा खा लेना चाहिए, लेकिन अपनी सेहत के लिए महज ज्यादा खा लेना ही काफी नहीं है। हम क्या खाते हैं वह भी मायने रखता है? जैसे हमें दिन भर में अलग-अलग तरह की चीजें खानी चाहिए। पर उसका मतलब यह नहीं है कि हम कई तरह के जंक फूड को ही खा लें। उससे फायदे से ज्यादा नुक्सान ही होगा।

खाने में वैरायटी की बात सुन कर कोई भी चहक सकता है। लेकिन उसका मतलब ऊटपटांग खाना नहीं है। उस वैरायटी के मायने हैं हैल्दी फूड। आमतौर पर हमें फायदा देने वाला खाना अच्छा नहीं लगता। सो, एकाध चीजें खा कर ही हम भाग लेते हैं, लेकिन अगर सेहत बनाए रखनी है, तो उस एकाध से काम नहीं चलेगा।

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