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लोकगाथा भारतीय संस्कृति की पहचान: तीजनबाई

पद्मश्री एवं पद्म भूषण समेत कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात पंडवाणी कलाकार तीजनबाई ने कहा है कि लोकगाथा भारतीय संस्कृति की पहचान और हमारी धरोहर है जिसे पश्चिमी संगीत कभी भी कमजोर नहीं कर सकती।

तीजनबाई ने सोमवार को दरभंगा में तीन अलग-अलग स्थानों पर अपना मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत करने के बाद कहा कि भारतीय संस्कृति काफी विशाल है। इसे एक दूसरे के साथ आदान-प्रदान करने से समरसता का भाव उत्पन्न होगा। उन्होंने कहा कि विदेशों में जहां भी वह गई है लोग लोकगाथा को पूरी तनमयता से सुनते हैं और बार-बार सुनाने का आग्रह भी करते हैं।

इससे साबित होता है कि पाश्चात्य संगीत वाले देशों के लोग भी भारतीय संस्कृति एवं लोकगाथा को पसंद किया जाता है। अमेरीका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों की अपनी यात्रा की चर्चा करते हुए पंडवाणी गायिका ने कहा कि देश ही नहीं विदेशों में भी भारतीय लोकगाथाओं को सुनने वालों की संख्या अधिक है। उन्होंने पंडवाणी गायकी में अपने पदार्पण के दिनों को याद करते हुए कहा कि पढ़ाई नहीं करने के कारण उन्हें कई बार मां की पिटाई खानी पड़ी और 13 वर्ष की उम्र में घर छोड़ना पड़ा।

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