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ओएनजीसी ने राजभाषा को दिया उल्लेखनीय योगदान

भारत की महारत्न कंपनी ‘ओएनजीसी’ का कार्यक्षेत्र है - भूगर्भ से कच्चे तेल का उत्पादन व विपणन।  इस विशाल कंपनी का आरंभ देहरादून में स्थित भारत सरकार के सर्वेक्षण विभाग की एक शाखा के रूप में हुआ, जिसका कार्य था हाइड्रोकार्बनों की खोज।

14 अगस्त सन 1956 को इस निदेशालय को स्वतंत्र आयोग का दर्जा देते हुए इसे ‘तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग का नाम दे दिया गया। सन 1994 को इसे आयोग की श्रेणी से हटा कर आयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन  नाम से भारत सरकार के नियंत्रण वाली कंपनी का स्वरूप मिला।

आज से लगभग 54 वर्ष पहले देहरादून की सुरम्य घाटी में रोपा गया यह पौधा आज एक विशाल वटवृक्ष में बदल गया है। इसकी शाखा- प्रशाखाएं आज विश्व के अठारह देशों में फैल चुकी हैं। कभी भारत सरकार से बजट लेकर पलने वाली यह कंपनी आज सरकार को  सर्वाधिक राजस्व  देने वाली कंपनी बन चुकी है।

ओएनजीसी-राजभाषा के क्षेत्र में
एनजीसी को यह गौरवपूर्ण स्थान लीक से हटकर चलने और मनोनीत दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ तेजी से आगे बढने से प्राप्त हुआ है। ओएनजीसी आज केवल देश को ऊर्जा ही प्रदान नहीं करता, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में भी पूरी निष्ठा के साथ हाथ बँटाता है। ओएनजीसी जो ठान लेता है, वह कर दिखाता है, यह बात आज जग जाहिर है।

एक विराट कंपनी होते हुए भी ओएनजीसी ने भारत सरकार के निर्देशानुसार अपने शुद्ध लाभ का 2 प्रतिशत निगमित सामाजिक  दायित्व (सीएसआर) में खर्च करने का निश्चय किया है। निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण, शिशुविहार, पत्र पत्रिकाओं का आर्थिक सहयोग द्वारा भरण पोषण, मेधावी छात्रों को छात्रवृत्तियां, स्वयंसेवी संस्थाओं को आर्थिक सहायता आदि कितने ही माध्यमों से आज ओएनजीसी राष्ट्र की सामाजिक सेवा कर रहा है।

जहां एक ओर महामहिम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. कलाम जी ने ओएनजीसी जिजीविषा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है, वहीं संसदीय राजभाषा समिति जैसी सर्वाधिकार संपन्न समिति ने ओएनजीसी की राजभाषा संबंधी उपलब्धियों की सराहना करते हुए ओएनजीसी से बड़े कार्यों की अपेक्षा की है। उन प्रशंसाओं और अपेक्षाओं का संबल लेकर तेजस्वी मन से नये लक्ष्यों की ओर अग्रसर हों, यह पूरा  देश चाहता है।

ओएनजीसी के कार्यालय भारत के सभी  भाषाओं वाले प्रदेशों में स्थित हैं उन प्रदेशों की राज्यभाषा के साथ सुन्दर सामंजस्य बनाते हुए आज हिन्दी पूरे ओएनजीसी में पल्लवित हो रही है। ओएनजीसी के सभी कार्यालयों में आयोजित राजभाषा समारोह में हिन्दीतरभाषी हिन्दी रचनाकारों विद्वानों को सम्मानित करने की परम्परा है। इस परंपरा में अब तक श्रीमती वाणी जयराम, डबालशौरि रेड्डी, श्रीमती विष्णुप्रिया, श्री रशौरिराजन और डॉ. अंबाशंकर नागर का सम्मान किया गया।

ओएनजीसी ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा अपने कार्यालयों में, परियोजनाओं में स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करने का प्रयास भी किया है़ समय समय पर हमारे कार्यकेन्द्रों पर श्रेष्ठ नाटकों का मंचन होता रहता है, जिसमें हमारे कार्मिक व उनके परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।

इसी प्रकार हिन्दी साहित्य के प्रसिद्घ कवियों को बुलाकर कवि सम्मेलन कराए जाते हैं। इससे स्वस्थ मनोरंजन की परंपरा को बल मिलता है। हमारे कार्यालयों को लगातार नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रथम पुरस्कार दिया जाना इस बात का प्रमाण है कि हिन्दीतर प्रदेशों में हिन्दी का प्रचार व प्रसार करके ओएनजीसी राष्ट्रीय एकता अखंडता के अभियान को मजबूत कर रहा है।

हिन्दी मे उत्कृष्ट काम करने वाले कार्मिकों के लिए हमने अनेक प्रोत्साहन योजनाएं आरंभ की हैं, जिनका भरपूर लाभ हमारे कार्मिक उठाते हैं। ओएनजीसी की बैठकों में, यहाँ तक कि बोर्ड की एक्जेक्यूटिव की बैठकों में  हिन्दी में सहज संवाद होने लगा है। कार्यान्वयन का दूसरा पक्ष हिन्दी को कागज पर उतारने का है।

इस दिशा में द्विभाषिक साफ्टवेयरों की मदद बहुत कारगर हो रही है। ओएनजीसी में राजभाषा का कार्यान्वयन हिन्दी प्रतियोगिताओं और हिन्दी समारोहों तक सीमिति न रहकर दैनंदिन काम का अंग बना है। हिन्दी ओएनजीसी के सभी कार्यालयों में आपसी संवाद का प्रबल माध्यम बन चुकी है। ओएनजीसी द्वारा भारत में पहली बार विश्व हिन्दी सम्मेलन का शुभारंभ किया गया है। देश विदेश के अनेक विख्यात हिन्दी साहित्यकार इसमें भाग लेकर इसकी गरिमा बढ़ा चुके हैं। संसदीय राजभाषा समिति ने भी इस की सराहना की है।

इसी तरह साहित्य की ऐसी अनेक उत्कृष्ट पत्रिकाएं, जिनकी समसामयिकता व साहित्यिक ईमानदारी निर्विवाद है, इन्हीं पत्रिकाओं को विज्ञापनों के रूप में सहयोग देकर ओएनजीसी ने जीवित रखा है।

इसी तरह हिन्दी साहित्य की अनेक पुरस्त पुस्तकें हमारे हिन्दी पुस्तकालय भारी मात्रा में खरीदते हैं। इससे न केवल हमारे कार्मिकों का मानसिक स्तर ऊंचा उठता है, बल्कि साहित्य पढ़ने की जो आदत आज टूटती जा रही है, वह भी पुनर्जीवित होती है।

भाषा क्षेत्र में प्रमुख उपलब्धियां
ओएनजीसी भाषा साहित्य के अनेक कार्यक्रमों का प्रायोजक भी है। उदाहरण के तौर पर सुप्रसिध्द गीतकार व फिल्म निर्माता स्वर्गीय श्री शैलेन्द्र की स्मृति में प्रतिवर्ष शैलेन्द्र सम्मान समिति रूड़की द्वारा आयोजित समारोह में गुलजार, श्री कैफी आजमी, गीत सम्राट पद्मश्री डा. गोपाल दास नीरज और तारे जमीं पर के सुप्रसिद्ध गीतकार श्री प्रसून जोशी अब तक सम्मानित हो चुके हैं।

फिल्मों और टीवी चौनलों ने हिन्दी को घर-घर पहुँचा दिया है। बाजार की भाषा के रूप में हिन्दी नयी सजधज के साथ आगे आई है और नई पीढी के ज्यादा करीब पहुँची है। दूरदर्शन के सौजन्य से भी हमारे अनेक कार्यकेन्द्रों पर कवि सम्मेलन कराए जाते हैं जिनका प्रसारण राष्ट्रीय चैनलों पर होता है। यह एक शुरूआत भर है। ओएनजीसी के मजबूत कदम अभी राजभाषा क्षेत्र में रुकने वाले नहीं, जहां पेट्रोलियम उत्पादन में ओएनजीसी ने नए विश्व कीर्तिमान स्थापित किये हैं, वहीं राजभाषा हिन्दी को भी उसके गरिमामय स्थान पर प्रतिष्ठित करने मे भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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