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विश्व खिताब के बाद सुशील की निगाह राष्ट्रमंडल खेलों पर

विश्व खिताब के बाद सुशील की निगाह राष्ट्रमंडल खेलों पर

विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पिछले छह दशक के मिथक को तोड़ने के बाद पहलवान सुशील कुमार की निगाहें अगले महीने होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं जहां उन्हें उम्मीद है कि भारत कम से कम कुश्ती में 15 स्वर्ण पदक जरूर जीतेगा।

सुशील ने कल मास्को में स्थानीय पहलवान गोगेव एलन को 3-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। भारत को पिछले छह दशक से इस उपलब्धि का इंतजार था। यह विश्व चैंपियन अब राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतना चाहता है। उन्होंने कहा कि बीजिंग ओलंपिक खेलों के बाद और राष्ट्रमंडल खेलों से पहले विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। मेरा अगला लक्ष्य दिल्ली खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है।
 
सुशील ने कहा कि मैं वास्तव में भाग्यशाली हूं कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला पहलवान बना। मेरे साथ पूरे देश का सहयोग और दुआएं थी जिससे मैं यह उपलब्धि हासिल करने में सफल रहा। ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता पहलवान का मानना है कि अक्टूबर में होने वाले खेलों में भारतीय पहलवानों का दबदबा रहेगा।

उन्होंने कहा कि मेरा पूरा विश्वास है कि भारत सभी 21 वर्गों में पदक जीत सकता है। इसके अलावा मुझे लगता है कि हमने जिस तरह से अभ्यास किया है उसे देखते हुए 13-14 स्वर्ण पदक जरूर जीतेंगे।

सुशील ने अपनी उपलब्धि के बारे में कहा कि यहां मुकाबला कड़ा था क्योंकि बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वाले पहलवान इसमें भाग ले रहे थे लेकिन मेरा सबसे कड़ा मुकाबला सेमीफाइनल में अजरबेजान के प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ था क्योंकि वह हाल में ओलंपिक स्वर्ण और रजत पदक विजेता को हराकर यूरोपीय चैंपियन बना था। उन्होंने कहा कि मुझे फाइनल में रूस के स्थानीय खिलाड़ी से भिड़ना पड़ा जिसे खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था और इसलिए यह मुकाबला भी कड़ा था। सुशील को पहले दौर में बाई मिली। इसके बाद उन्होंने यूनान के आररिटिडिस, जर्मनी के मार्टिन सेबेस्टियन और मंगोलिया के बुयान जाव को हराया।

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