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सेब उत्पादन से ग्राहकों की बल्ले-बल्ले

सेब उत्पादन से ग्राहकों की बल्ले-बल्ले

हिमाचल प्रदेश में इस बार सेब के रिकार्ड उत्पादन से जहां लोगों को सेब सस्ते दाम पर उपलब्ध हो रहा है वहीं उत्पादकों को बंपर उत्पादन के चलते इस साल अपनी आय कम रहने की चिंता सताने लगी है।

हिमाचल सेब उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष लेखराज चौहान ने कहा कि वर्ष 2010 में सेब का बंपर उत्पादन के बावजूद यह दुखद है कि सेब उत्पादकों की आय पिछले वर्ष के मुकाबले आधी रह गयी है। इसका कारण सेब के मूल्य का दिल्ली समेत अन्य बाजार में पिछले साल के मुकाबले आधा रहना है।
 
कुल्लु घाटी में करीब 5,000 पेड़ के मालिक प्रेम शर्मा ने कहा कि मैंने पिछले साल 7,000 बक्से (प्रत्येक बक्से में 20 किलो) बेचकर लगभग 50 लाख रुपए अर्जित किये थे। लेकिन इस साल 15,000 बक्से के उत्पादन के बावजूद, मुझे 40 से 45 लाख रुपए से अधिक की आय की उम्मीद नहीं है। कुल्लु और रामपुर बुशहर के उत्पादकों की भी यही कहानी है।

दिल्ली स्थित चैंबर आफ आजादपुर फ्रूट एंड वेजिटेबल्स ट्रेडर्स के अध्यक्ष मेथराम कपलानी ने कहा कि बाजार में हिमाचल सेब की आपूर्ति इस बार 40 फीसद अधिक है। इसके कारण कीमत पिछले साल के मुकाबले लगभग आधी है।
   
एशिया की सबसे बडी आजादपुर मंडी में सेब के बक्से (22 किलो) का भाव 400 से 900 रुपए है जबकि पिछले साल इसका भाव 900 रुपए से 1,600 रुपए तक था। हिमाचल बागवानी विभाग के सूत्रों के अनुसार इस बार अच्छी बर्फबारी और बारिश से राज्य में 3 करोड़ बक्सा सेब उत्पादन का अनुमान है। पिछले साल यहां 1.4 करोड़ बक्से सेब का उत्पादन हुआ था।
  
सूत्रों के अनुसार अक्टूबर तक चलने वाले सेब के इस मौसम में अबतक 2.35 करोड़ बक्से दिल्ली और चंडीगढ़ के बाजार में पहले ही पहुंच चुके हैं।

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