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फेडरर के खिलाफ मैच को कभी नहीं भूलूंगा : बोपन्ना

फेडरर के खिलाफ मैच को कभी नहीं भूलूंगा : बोपन्ना

भारतीय टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना ने पाकिस्तान के आयसम उल हक़ कुरैशी के साथ जोड़ी को विशेष करार करते हुए कहा कि एक-दूसरे पर विश्वास करना ही उनकी सफलता की कुंजी है।

बोपन्ना-कुरैशी की इंडो पाक एक्सप्रेस जोड़ी अमेरिकी ओपन के युगल फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचने से चूक गई लेकिन दोनों उप विजेता बनकर भी खुश हैं क्योंकि उन्हें अमेरिका की शीर्ष वरीय बॉब और माइक ब्रायन बंधुओं की जोड़ी से शिकस्त मिली जिन्हें हराना काफी मुश्किल है।

बोपन्ना ने कहा कि आयसम के साथ अभी तक एटीपी टूर्नामेंट में मेरा सफर काफी अच्छा रहा है और उम्मीद है कि हम भविष्य में मिलकर कई खिताब अपने नाम करेंगे। उनसे जब दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी रोजर फेडरर से हुए मुकाबले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इस मैच को ताउम्र नहीं भूल पाएंगे और यह उनके करियर का सबसे खुशगवार लम्हा है।

बोपन्ना ने कहा कि जर्मनी में मुझे उनके खिलाफ ड्रा मिला था और मेरे लिए यह अदभुत क्षण था क्योंकि मुझे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के सामने खेलने का मौका मिला था और अपने आदर्श के खिलाफ खेलना ऐसी चीज़ है जो मैं कभी भी नहीं भूल पाउंगा।

बोपन्ना ने कहा कि फेडरर टेनिस के महान खिलाड़ियों में से एक हैं इसलिए मैं मैच से पहले नर्वस था, लेकिन पहली सर्विस के बाद मैं सहज हो पाया और इसके बाद मैंने इस मैच के हर क्षण का आनंद उठाया। फेडरर के खिलाफ मैच से उन्हें क्या सीख मिली, इस बारे में उन्होंने कहा कि पूरे मैच में वह आपको एक भी मौका नहीं देते और आपको उनका सामना करते हुए बस अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेलना होता है। मैंने उनसे यही सीखा कि अपने प्रतिद्वंद्वी को कभी भी मौका मत दो।
     
आयसम के साथ जोड़ी बनाने के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमारी जोड़ी की सबसे बड़ी बात यह है कि हम एक दूसरे पर पूरा भरोसा करते हैं और यही हमें सफल बनाता है। हम पहली बार ग्रैंडस्लैम के फाइनल में पहुंचे, यह शानदार था।
     
बोपन्ना कहते हैं कि भारतीय स्टार लिएंडर पेस और महेश भूपति ने उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ये दोनों भारत के महान एंबेसडर हैं। जब मैंने डेविस कप के लिए शुरूआत की थी तो ये दोनों मेरे आदर्श थे। उन्होंने इतने सारे ग्रैंडस्लैम खिताब अपने नाम किए है और निश्चित रूप से मुझे सही दिशा में बढ़ने की प्रेरणा दी। मैं उन्हें खेलते हुए देखता था और इन्होंने मुझे सलाह भी दी कि मैं कैसे सुधार कर सकता हूं क्योंकि वे खुद भी इसी दौर से गुज़र चुके थे।

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