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भाजपा ने उमर को हटाने की मांग की

भाजपा ने उमर को हटाने की मांग की

सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल समिति की सोमवार को होने वाली बैठक से पहले भाजपा ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हटाने की मांग की और साथ ही सशस्त्र सेना विशेष अधिकार कानून (एएफएसपीए) में किसी तरह के संशोधन के प्रति चेतावनी दी।

भाजपा के र्शीष नेताओं ने कहा यह समय है कि उन्हें (उमर अब्दुल्ला को) हटाकर किसी और स्वीकार्य व्यक्ति को बैठाया जाए। एक अलोकप्रिय मुख्यमंत्री अपने लोगों से पूरी तरह कट जाता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के निवास पर हुई बैठक के बाद जारी एक पेज के एक बयान में पार्टी ने आरोप लगाया गया कि कश्मीर समस्या से निपटने के मामले में केंद्र सरकार में सोच का सख्त अभाव है।

बैठक में आडवाणी के अलावा सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, एसएस अहलुवालिया और रविशंकर प्रसाद ने हिस्सा लिया। बयान में भाजपा ने कहा कि पिछले तीन महीने में घाटी में स्थिति में अचानक गिरावट आई है। पार्टी ने सशस्त्र सेना विशेष अधिकार कानून (एएफएसपीए) में किसी तरह के संशोधन के प्रति केन्द्र सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यह अलगाववादियों या वोट बैंक की राजनीति के तुष्टिकरण का समय नहीं है।

पार्टी ने कहा कि यह कार्रवाई का समय है। सरकार को किसी भी परिस्थिति में राज्य के किसी भी अशांत जिले से एएफएसपीए हटाने पर विचार नहीं करना चाहिए। सुरक्षा के माहौल को मजबूत बनाया जाना चाहिए और शरारती तत्वों में डर होना चाहिए।
भाजपा ने कहा कि समस्या की गंभीरता को समझने और उसे सुलझाने का प्रयास करने की बजाय केन्द्र सरकार इस मुगालते में है कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (एएफएसपीए) को नरम बनाकर अलगाववादियों का तुष्टीकरण किया जा सकता है।

बयान में कहा गया है कि अलगाववादी चाहते हैं कि केन्द्र सरकार को ऐसी स्थिति में पहुंचा दें कि भारत और जम्मू कश्मीर राज्य के बीच राजनीतिक संबंध ढीले पड़ जाएं। पार्टी ने कहा कि और एक बार सरकार अगर इस मोर्चे पर हारती है तो अलगाववादी सरकार द्वारा दी गई रियायतों को नकार कर अगले चरण की तरफ बढ जाएंगे जब तक कि उन्हें आजादी के अपने घोषित लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती।

पार्टी ने कहा कि यह धारणा कि ये शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी हैं, ईद के दिन ही टूट गई। पार्टी ने गड़बड़ी करने के लिए एकत्र हुई भीड़ के इरादे को न समझ पाने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की। पार्टी ने कहा कि पिछले दो दिन के घटनाक्रम से लागों को लगा है कि घाटी में सुरक्षा मजबूत की जानी चाहिए न कि ढीली। पार्टी ने समस्या की गंभीरता और गहराई को न समझ पाने के लिए केन्द्र की आलोचना की।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में सीसीएस की कल होने वाली बैठक में कश्मीर की स्थिति पर चर्चा होगी और इसमें कुछ क्षेत्रों में एएफएसपीए को आंशिक रूप से हटाये जाने पर विचार हो सकता है।
 इससे पहले पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सशस्त्र सेना विशेष अधिकार कानून (एएफएसपीए) में किसी तरह के संशोधन से घाटी में सुरक्षा बलों का मनोबन गिरेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा आगाह करना चाहती है कि एएफएसपीए को किसी प्रकार से कमजोर करने का प्रयास अस्वीकार्य होगा। किसी भी राजनीतिक दबाव में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवादियों से लड़ते हुए बलिदान देने वाले सुरक्षा बलों के मनोबल से समझौता करने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

 

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