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बनने लगी जीनोम पत्री

पिछले दिनों अमेरिका की एक कंपनी बायोनैनोमैट्रिक्स ने ‘ऑन डिमांड’ जीनोम पत्री बनानी प्रारंभ कर दी है। कंपनी के शोधकर्ता डॉ़ हान काओ ने एक ऐसी चिप तैयार की है जो नैनो तरल से बनी हुई है। इस चिप में मानव विशेष के डीएनए की लम्बी डोरी को संजोया जाता है जो नैनोतरल के सामने खुलते जाते हैं और उन्हें पारंगत विशेषज्ञ पढ़ता है।

इसी आधार पर व्यक्ति को होने वाले रोगों का पता चलता जाता है। यह जानकारी भले-चंगे व्यक्ति को पहले ही मिल जाती है, सो वह आने वाले कहर से बचने के उपाय कर सकता है। हां, इसमें बहुत से रोग के कारक ऐसे भी होंगे जो आपकी गलत आदतों से पनपेंगे तो उन्हें तो कम से कम रोका ही जा सकेगा। शोधकर्ताओं का दावा है कि ‘ऑन डिमांड’ ‘जीनोम पत्री’ सेंपल लेने के बाद मात्र आठ घंटे में तैयार हो जाएगी। दक्षिणा यानी सेवा शुल्क होगा सौ डॉलर।

उनके चेहरे पर आ जाएगी रौनक
खूबसूरत चेहरे पर झुर्रियां, ढीलापन आ जाना महिलाओं के पांव तले जमीन खिसका देता है। इन जख्मों पर मरहम लगाती एक खबर अमेरिकन एकेडेमी ऑफ डर्मेटोलॉजी से आई है। रिपोर्ट के अनुसार महिला विशेष की त्वचा की दशा के आधार पर विटामिन-के और नियासीन की तालमाल बिठा नियमित सेवन करना झुर्रियों को गुडबाय कर देगा। इसके अलावा, वैज्ञानिक द्वारा ऐसी क्रीम भी तैयार कर ली गई है जो झुर्रियां पैदा करने वाले कोलोजन और इलास्टिन रसायनों के निर्माण में तेजी ला देती है। ज्ञात हो कि इन रसायनों का धीमा निर्माण ही त्वचा का लचीलापन कम करता है। इस क्रीम में पेप्टाराइड की मात्र विशेष तौर पर असरकारी है जो झुर्रियां    मिटाती है।

दूध पिलाया, जीवन पाया
जी हां, अब युवा माताएं अपनी फिगर की चिंता किए बगैर अपने कलेजे के टुकड़े को स्तनपान कराएंगी और मधुमेह से बची रहेंगी। यूनिवर्सिटी ऑफ पीटर्सवर्ग, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफॉर्निया और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ केरोलीना की ‘त्रिवेणी शोध’ ने ज्ञात किया है कि जो माताएं बच्चों को बेझिझक ‘ब्रैस्ट फीडिंग’ कराती हैं उनमें डायबिटीज की संभावना नहीं रहती। यहां तक कि एक माह तक स्तनपान कराना भी डायबिटीज से बचाता है। 

अपने परीक्षण में शोधकर्ताओं ने विभिन्न वर्ग की 40 से 70 वर्ष की आयु वाली माताओं को चुना और पाया कि जिन माताओं ने अपने बच्चों को प्रारंभ से स्तनपान कराया उनमें डायबिटीज का नामोनिशान न था। रिपोर्ट कहती है कि जो महिलाएं बिल्कुल भी स्तनपान नहीं करातीं, वह उम्र की ढलान पर मधुमेह और मोटापे का शिकार हो जाती हैं।

रिपोर्ट भारतीय महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहती है कि भारत की महिलाएं टाइप-2 डायबिटीज से अधिक प्रभावित होती हैं। दूसरे वह शारीरिक श्रम भी नहीं कर पाती। फलत: गर्भावस्था के दौरान उनमें उदर वसा की मात्र बढ़ जाती है। अत: भारतीय शहरी महिलाएं ब्रेस्ट फीडिंग से न कतराएं।

दुनिया दिखाएंगी नीली आंखें
कारे कजरारे नैनो की बात पुरानी हुई। अब नीली नीली आंखें आपकी बिगड़ती नजरों को बचाएंगी। सिडनी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की रिपोर्ट बताती है कि नीली आंखें न केवल खूबसूरती बढ़ाती हैं बल्कि अंधेपन के बड़े कारण मोतियाबिंद से भी बचाती है।

शोधकर्ता डॉ. क्रिस्टीन यूनान और उनके सहयोगियों की शोधपरक रिपोर्ट बताती है कि भूरी आंखों पर केट्रेक्ट यानी मोतियाबिंद का असर अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। बतौर परीक्षण डॉ़  क्रिस्टीन की टीम ने तीन हजार से ऊपर 49 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को चुना और पाया कि जिनकी आंखें नीली थीं, उनमें मोतियाबिंद नदारद था। परीक्षण में उन्हीं लोगों को पांच साल बाद फिर जांचा तो पाया गया कि भूरी आंखों में मोतियाबिंद अपना असर दिखा रहा था, मगर नीली आंखें मंद-मंद मुस्करा रही थीं।

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