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बीबीएस

वर्ल्ड वाइड वेब 1990 के दशक के मध्य में प्रचलन में आया, पर उसके पहले से ही कंप्यूटर का प्रयोग करने वाले लोग ऑनलाइन एक-दूसरे के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान करते आ रहे हैं। वर्ल्ड वाइड वेब से पहले सूचना, फाइल्स आदि को ऑनलाइन एक-दूसरे तक पहुंचाने के लिए जिस तकनीक का उपयोग किया जाता था, उसे बुलेटिन बोर्ड सिस्टम या बीबीएस कहते हैं।

इसके माध्यम से लोगों ने पहली बार समझा था कि ऑनलाइन कनेक्टिविटी क्या होती है। यह एक कंप्यूटराइज्ड बुलेटिन बोर्ड है, जिसका इस्तेमाल डायल-अप मोडम के जरिए होता है। साधारण शब्दों में कहा जाए तो यह आम बुलेटिन बोर्ड का कंप्यूटराइज्ड रूपांतरण है और इस पर प्रकाशित सूचनाओं का लाभ वही लोग उठा सकते हैं, जो उस बुलेटिन बोर्ड सिस्टम के सदस्य होते हैं। अधिकांश बुलेटिन बोर्ड सिस्टम खास विषयों पर केंद्रित होते हैं।

पहले बीबीएस सिस्टम का निर्माण 1978 में शिकागो कंप्यूटर क्लब के सदस्य वार्ड क्रिस्टेन ने किया था। बीबीएस 1980 के दशक से लेकर 1990 के दशक के मध्य तक विशेषतौर पर उत्तरी अमेरिका में बेहद लोकप्रिय रहा। चूंकि बीबीएस का इस्तेमाल डायल-अप मोडम के माध्यम से किया जाता था और लंबी दूरी के कॉल्स मुफ्त में उपलब्ध नहीं थे, इसलिए इसका इस्तेमाल करने वाले अधिकांश लोग एक ही इलाके के होते थे। धीरे-धीरे यह एक-दूसरे से जुड़ने और दोस्ती करने का जरिया भी बन गया था।

अधिकांश बीबीएस की सेवाएं मुफ्त उपलब्ध होती थीं, पर कुछ बुलेटिन बोर्डस अपनी सेवाओं के लिए पैसे भी लेती थीं। ऐसे बीबीएस अपने ग्राहकों को गैरकानूनी रूप से सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम आदि डाउनलोड करने की सुविधा देते थे। आज बुलेटिन बोर्ड सिस्टम का इस्तेमाल लगभग बंद हो चुका है, पर कई वेबसाइट्स पर इंटरनेट फोरम आज भी मौजूद हैं, जहां लोग अपनी राय रखते हैं। अमेरिका में बुलेटिन बोर्ड सिस्टम लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचा है। आज भी वहां कुछ सक्रिय बुलेटिन बोर्डस हैं।

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