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हड़ताली कर्मियों की सजा भुगत रहे मरीचा

हड़ताली कर्मचारियों की सजा भुगतना पड़ रहा है मरीजों को। सामान्य दिनों में सूबे के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में भर्ती होने के लिए मरीजों को बेड के लाले पड़े रहते थे। पर हड़ताल से स्थिति यह है कि करीब दो-तिहाई मरीजों का पलायन हो गया है। अस्पताल के 1675 बेडों पर अभी सिर्फ 678 मरीज ही भर्ती हैं। ओपीडी में भी कम संख्या में मरीजों इलाज के लिए आ रहे हैं। पीएमसीएच में इलाज के लिए राज्य के हर क्षेत्र से मरीज इलाज को पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में अस्पताल के ओपीडी में इलाज के लिए एक दिन में सत्रह सौ से दो हजार तक मरीज पहुंच जाते थे।ड्ढr ड्ढr मरीजों को आसानी से पैथोलॉजी, एक्स-र सहित अन्य प्रकार के जांच हो जाते थे। इसके साथ मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए दवाएं भी मुफ्त मिल जाती थी। हड़ताल के दौरान मुख्य एक्स-र और मुख्य पैथोलॉजी जांच बाधित हुआ। इधर सामान्य दिनों में अस्पताल के सभी बेड मरीजों से खचाखच भर रहते थे। इमरजेंसी विभाग में तो अतिरिक्त खाट लगानी पड़ती थी। इसके बाद फर्श पर भी मरीज पड़े दिखते थे। इसमें भारी गिरावट आ गयी है।ड्ढr ड्ढr ओपीडी में इलाज के लिए शनिवार को 76मरीज ही आए जबकि वार्डो में सिर्फ 678 रोगी ही भर्ती हैं। इसकी बड़ी वजह है दलाल। वे इलाज कराने आए मरीजों को निजी क्लीनिकों में बरगला कर ले जा रहे हैं। सैकड़ों मरीजों की जगह सिर्फ 2एक्स-र हुआ। अस्पताल के उपाधीक्षक डा.गणेश प्रसाद सिंह ने बताया कि सेवाओं में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है। जो मरीज आ रहे हैं उनके पूर्ण इलाज की व्यवस्था की जा रही है।ं

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