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ईश्वर को चुनौती देता चमत्कारी दिमाग

उन्होंने इस बार भगवान की सत्ता को चुनौती दी है। उसके अस्तित्व को ललकारा है। दुनिया जहान के गति विज्ञान को सबसे ज्यादा जानने वाले स्टीफन हॉकिंग भगवान के  अस्तित्व को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपनी नई किताब ‘द ग्रैंड डिजाइन’ में यह सनसनीखेज दावा किया है कि ब्रह्मांड को रचने का श्रेय भगवान को नहीं जाता। ब्रह्मांड वास्तव में भौतिक विज्ञान के अपरिहार्य सिद्धांतों का नतीजा है।

पूर्ण विकलांगता के बावजूद हॉकिंग एक चमत्कारी शख्स हैं। उनका दिमाग इतना चंचल है कि ब्रह्मांड की अबूझ गुत्थियों को सुलझाता रहता है। वे न हिल सकते हैं, न बोल सकते हैं। पूरे दिन वे अपनी कंप्यूटर वाली ह्वीलचेयर पर बैठे रहते हैं। करिश्माई ह्वीलचेयर में लगे कंप्यूटर से ही वे दूसरों से संवाद करते हैं। अपना लेखन करते हैं और जो ठान लेते हैं, उसे कर गुजरते हैं। मोटर न्यूरान डिजीज जैसी भयानक बीमारी भी उनके हौसले नहीं तोड़ पाती है।

इस बीमारी में इंसान की मांसपेशियां क्रमश: काम करना बंद कर देती हैं। इस स्थिति में भी वे 24 हजार फीट की ऊंचाई पर जीरो ग्रेविटी में तैरने का करिश्मा दिखा चुके हैं। अटलांटिक महासागर के ऊपर उन्होंने विशेष जेट विमान से 25 सेकंड भारविहीनता का अनुभव लिया है। हॉकिंग दूसरे ग्रहों में लोगों के बसने के समर्थक हैं। 

आधुनिक आइंस्टीन कहे जाने वाले हॉकिंग ब्लैक होल और बिग बैंग की संकल्पना के साथ सापेक्षता का नियम अंतरिक्ष में भी लागू होने की जानकारी दुनिया को बांट चुके हैं। हॉकिंग का जन्म गैलीलियो की मृत्यु के लगभग 300 साल बाद 8 जनवरी 1942 में ऑक्सफोर्ड, ब्रिटेन में हुआ। उनका परिवार उत्तरी लंदन में रहता था, जहां उस वक्त युद्ध के बादल मंडरा रहे थे।

हॉकिंग जब मां इसोबेल के पेट में थे, तो खतरे से बचने के लिए उनका परिवार ऑक्सफोर्ड चला गया। 1950 में उनका परिवार हर्टफोर्डशायर आ गया। यहां उन्हें ग्यारह साल की उम्र में सेंट अलबांस स्कूल में दाखिला दिलाया गया। वे सामान्य विद्यार्थी ही थे। उनके पिता फ्रैंक हॉकिंग उन्हें मेडिसिन पढ़ाना चाहते थे, लेकिन हॉकिंग गणित पढ़ना चाहते थे।

यूनिवर्सिटी में गणित विषय न होने के चलते उन्होंने भौतिक विज्ञान चुना और अब वे दुनिया के जाने-माने खगोलविज्ञानी हैं। उनकी किताब ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में है। हॉकिंग जब ऑक्सफोर्ड में पढ़ रहे थे, तभी उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला। 21 साल की उम्र में बीमारी ने उन्हें पूरी तरह से जकड़ लिया। उन्होंने अपनी पीएचडी अपने डॉक्टर टय़ूटर डेनिस विलियम सीआमा की मदद से पूरी की।

हॉकिंग कहते हैं कि 1965 में जब उन्होंने जेन विल्ड से शादी की, तो वह उनके जीवन का एक नया मोड़ था। जेन से उन्हें तीन बच्चों हैं। 1991 में जेन से उनका तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने अपनी नर्स ऐलेन मैसन से विवाह किया, लेकिन यह शादी भी छ: साल से अधिक नहीं चली। कैम्ब्रिज में गणित के प्रोफेसर हॉकिंग कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं। 1974 में वे रायल सोसायटी की फेलोशिप के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।                

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