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झारखंडः मुंडा ने दो मंत्रियों के साथ ली शपथ

झारखंडः मुंडा ने दो मंत्रियों के साथ ली शपथ

झारखंड में अर्जुन मुंडा ने शनिवार को एक समारोह में भाजपा-जेएमएम सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में लालकृष्ण आडवाणी सहित भाजपा के केंद्रीय स्तर का कोई बड़ा नेता नजर नहीं आया।

कहा जा रहा है कि पूर्व के अनुभवों के चलते झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के साथ सरकार बनाने को लेकर भाजपा के भीतर मतभेद थे। आल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) के प्रमुख सुदेश महतो और जेएमएम नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन ने भी शपथ ग्रहण की।

शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे निर्धारित था, लेकिन यह 11 बजकर 55 मिनट पर हुआ और जिसे अधिक शुभ समय माना गया। समारोह से आडवाणी और सुषमा स्वराज तथा अरुण जेटली सहित अन्य नेता दूर रहे जो संभवत: जेएमएम से संबंध टूटने के बाद उसके साथ सरकार बनाए जाने को लेकर नाराज थे।

भाजपा और जेएमएम के बीच उस समय संबंध टूट गए थे जब शिबू सोरेन ने लोकसभा में कटौती प्रस्तावों पर संप्रग सरकार के पक्ष में मतदान किया था। भाजपा नेताओं का हालांकि आधिकारिक रूप से यह कहना है कि आडवाणी शनिवार को पड़ रहे त्योहारों की वजह से शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुए, लेकिन पार्टी सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेता घटनाक्रमों से नाराज हैं।

बताया जाता है कि भाजपा नेता पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी और पूर्व प्रमुख राजनाथ सिंह द्वारा दूसरों को राजी किए बिना झारखंड में गठबंधन सरकार बनाने का फैसला किए जाने से नाराज हैं। राज्यपाल एमओएच फारुक ने नौ सितंबर को मुंडा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था और निर्देश दिया था कि वह सदन में अपना बहुमत एक सप्ताह के भीतर साबित करें।

42 वर्षीय भाजपा नेता तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं और वह राज्य के गठन के दस सालों में आठवें मुख्यमंत्री हैं, जबकि दो बार राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। झारखंड 15 नवम्बर 2000 को बिहार से अलग होकर एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था।

मुंडा को विधानसभा में कुल 81 में से 45 विधायकों का समर्थन हासिल है। राज्य में अब तक कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। भाजपा और जेएमएम तीन महीने के अलगाव के बाद फिर से एक हुए हैं। दोनों के अलग होने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।

राष्ट्रपति शासन एक जून को लगा था। भाजपा द्वारा शिबू सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिए जाने के बाद विधानसभा निलंबित रखी गई थी। बाद में कोई भी दल वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए सामने नहीं आया।

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