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विवाद अपनी जगह, पर झंडा बुलंद रहेगा हमारा

विवाद अपनी जगह, पर झंडा बुलंद रहेगा हमारा

कॉमनवेल्थ गेम्स, 2010 की मेजबानी के लिए दिल्ली में तैयारी आखिरी चरण में है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गेम्स की तैयारी की कमान अपने हाथ में ली है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित एवं चेयरमैन सुरेश कलमाड़ी की मानें तो दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए पूरी तरह तैयार है।

कॉमनवेल्थ गेम्स पहली बार हेमिल्टन-कनाडा (1930) में आयोजित हुआ था। तब यह ब्रिटिश इम्पायर गेम्स के नाम से आयोजित हुआ था। आगामी 3 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के मध्य दिल्ली में उन्नीसवां कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन होगा। भारत में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन होने जा रहा है। इससे पहले दिल्ली में 1951 एवं 1982 एशियन गेम्स का सफल आयोजन किया जा चुका है।

दिल्ली में 3 अक्टूबर, 2010 से 72 कॉमनवेल्थ देश 271 स्वर्ण, 271 रजत और 282 ब्रांज मेडल के लिए आपस में जंग करेंगे। खेल प्रारंभ होने से पहले ही दिल्ली में आयोजन को लेकर हमारे नेताओं और खेल विशेषज्ञों में जंग छिड़ी हुई है।
पूर्व खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर ने तो कॉमनवेल्थ गेम्स का ‘बेड़ा गर्क हो जाने’ का शाप तक दे डाला है। गेम्स के आयोजन की तैयारी धीमी रफ्तार से चल रही है। आयोजन समिति पर फंड के गलत दुरुपयोग का आरोप भी लग चुका है। कई विदेशी खिलाड़ियों ने भारत में आतंकी साया के मद्देनजर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

इस आयोजन ने पहले ही दिल्लीवासियों को महंगाई की मार से चित कर डाला है। अब लाख टके का सवाल यह है कि क्या कॉमनवेल्थ गेम्स का सफल आयोजन दिल्ली में हो पाएगा? विगत वर्षों में बार-बार बम विस्फोट से दहली दिल्ली गेम्स के आयोजन के दौरान सुरक्षित रहेगी? क्या दिल्ली के साथ इस गेम्स के आयोजन से देश का नाम रौशन होगा। इन ज्वलंत सवालों की चर्चा आज सभी के जुबान पर है। आइए इन उलझे सवालों को सुलझाने के लिए ग्रह-सितारों की चाल पर एक नजर डालते हैं। तो चलिए जानते हैं क्या कहती है कॉमनवेल्थ 2010 की कुंडली?

कॉमनवेल्थ गेम्स, 2010 का शुभारम्भ 3 अक्टूबर रविवार को संध्या 7 बजे नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होगा। भारतीय ज्योतिष के अनुसार गेम्स का शुभारम्भ आश्विन माह,कृष्ण-पक्ष, दशमी उपरांत एकादशी तिथि को आश्लेषा नक्षत्र, सिद्ध योग, बव करण, मेष लग्न तथा कर्क राशि में होगा। अर्थात् कॉमनवेल्थ गेम्स, 2010 की कुंडली मेष लग्न, कर्क राशि की बनेगी।

गेम्स की कुंडली?

1.मेष लग्न में लग्नेश मंगल की सप्तम भाव में सप्तमेश शुक्र के साथ स्थिति आयोजन की भव्यता में चार चांद लगाएगा, किंतु राहु के नक्षत्र में मंगल विवादों को भी जन्म देगा।
2.चन्द्रमा सप्तमी चतुर्थ में और नक्षत्र स्वामी बुध भी स्वराशि/उच्च का स्थित होकर विपरीत परिस्थिति में बेहतर आयोजन को दर्शा रहा है। हां बुध+शनि की युति विवादपूर्ण सफलता दिलाएगी।
3.लग्न पर मंगल, राहु और लग्नेश मंगल पर केतु की दृष्टि गेम्स के दौरान दुर्घटना, मेहमान देशों के खिलाड़ी अधिकारियों द्वारा आरोप एवं आतंकवादियों की बुरी निगाह को दर्शा रहा है।
4.बुध दशा-बुध अंतकरण में सूर्य के प्रत्यांतर में गेम्स का शुभारंभ एवं समापन आयोजन समिति के कई अधिकारियों की प्रबंधन क्षमता का लोहा मनवाएगा और कुछ अधिकारियों को कानूनी विवाद में फंसाएगा।

5.केतु के नक्षत्र का मेष लग्न पर राहु के नक्षत्र में स्थित मंगल, शुक्र एवं केतु के नक्षत्र में स्थित राहु की दृष्टि इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में कई खेलों में नये कीर्तिमान बनने के साथ-साथ भ्रष्टाचार, विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और खेल पर राजनीति हावी होने के भी नए रिकार्ड बनेंगे। खेल के कुछ पुराने चैंपियन खिलाड़ी का सपना टूटेगा।

कैसा रहेगा भारत का प्रदर्शन?

स्वतंत्र भारत की कुंडली वृष लग्न तथा कर्क राशि की है। वर्तमान समय गेम्स के दौरान सूर्य दशा-मंगल अंतरदशा-शुक्र की प्रत्यांतर दशा रहेगी। देश की कुंडली में सूर्य, शुक्र की योगकारक स्थिति पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन को दर्शा रहा है। जिन खेलों में हमने अब तक मेडल का खाता नहीं खोला उनमें भी सफलता मिलेगी। इस बार भारत अपने पदकों की संख्या बढ़ाने में कामयाब रहेगा। कुछ स्टार खिलाड़ियों को निराशा हाथ लगेगी, तो कुछ नये उदीयमान खिलाड़ी तिरंगे की शान बढ़ाएंगे।

राहु का अशुभ प्रभाव खेलों पर विवाद व राजनीति हावी रहेगा

मंगल, चंद्र की स्थिति भव्य आयोजन दर्शा रहा है

बुध, शनि गेम्स को विवादपूर्ण सफलता दिलाएंगे

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