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कागजों पर ही भर्ती कर दिए 17 मरीज

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में ओपीडी को आईपीडी में बदलने का खेल काफी दिनों से जारी है। झूंसी के एक नर्सिगहोम में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। कागजों में नर्सिंगहोम में अलग-अलग दिनों में 17 मरीज भर्ती किए गए लेकिन बीमा कम्पनी की टीम को अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला। बीमा कम्पनी की शिकायत पर स्मार्ट कार्ड वितरण प्रभारी आरसी पाण्डेय ने नर्सिगहोम संचालक से स्पष्टीकरण माँगा है।


स्वास्थ्य बीमा योजना में जिले में सरकारी अस्पतालों के अलावा 64 निजी अस्पतालों का भी चयन किया गया है। इनमें झूँसी का शारदा नर्सिगहोम भी है। यहाँ नौ सितम्बर को स्मार्ट कार्ड धारक रमेश चन्द्र, सोहन लाल, दूधनाथ, बद्रीप्रसाद, रामकृपाल, छोटेलाल के परिवार की कृपा देवी, भुल्लन के परिवार की ननका देवी, कुसुम देवी तथा राम अभिलाषा को भर्ती किया गया। भर्ती होने से पहले स्मार्ट कार्ड को पास मशीन से टच कराया जाता है। इससे कम्पनी के कम्यूटर में भर्ती मरीज का विवरण दर्ज हो जाता है। फिर कम्पनी के कर्मचारी मरीज के भर्ती होने का सत्यापन करते हैं। पासिंग मशीन के विवरण के अनुसार आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की टीम शुक्रवार को नर्सिगहोम पहुँची तो वहाँ कोई मरीज भर्ती ही नहीं था। बीमा कम्पनी रिलेशनशिप मैनेजर शरद ने बताया कि इस नर्सिगहोम में नौ अगस्त को तेरसूराम,  नौ जुलाई को ब्रrादीन, ब्रrादीन के एक वर्षीय पुत्र रितिक रोशन,रामसूरत व स्मार्ट कार्ड धारक मानसिंह के 12 वर्षीय पुत्र सूर्य प्रकाश के भर्ती होने की सूचना दी गई थी। जांच के बाद ये मरीज भी अस्पताल में नहीं मिले थे। नर्सिगहोम संचालक का कहना था कि इन मरीजों को छुट्टी दे दी गई है। रिलेशनशिप मैनेजर ने स्मार्ट कार्ड प्रभारी जिला विकास अधिकारी से शिकायत दर्ज कराई। जिला विकास अधिकारी ने नर्सिगहोम संचालक से स्पष्टीकरण माँगा है। उन्होंने बताया कि इसके बाद नर्सिगहोम में भर्ती किए गए मरीजों से भी पूछताछ की जाएगी।

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