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लौटाए जाएंगे सिविल वन

अंग्रेजों के शासनकाल में वनों के बंदोबस्त के नाम पर सरकार के नियंत्रण में ले लिए गए सिविल वन दोबारा वन पंचायतों को लौटाए जाएंगे। पंचायतों को हस्तांतरित किए जाने के लिए 10 हजार हेक्टेअर भूमि चिन्हित भी कर ली गई है। सिविल वन पंचायतों को मिलने के बाद न केवल पंचायती वनों का क्षेत्रफल बढ़ कर लगभग दोगुना हो जाएगा बल्कि ग्रामीणों के लिए घास, लकड़ी की उपलब्धता भी बढ़ जाएगी। वे सिविल की इस भूमि में जड़ी-बूटियां भी उगा सकेंगे।सिविल वनों के हस्तांतरण के बाद राज्य के केवल दो श्रेणी के वन रह जाएंगे। 


राज्य में सिविल एवं सोयम वन लगभग चार हजार सात सौ वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हैं। इस पर राजस्व विभाग का नियंत्रण है। इसके कुछ हिस्से में सघन तो कहीं बहुत कम घनत्व वाले जंगल हैं। ज्यादातर इलाका बंजर है। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय सिविल वनों को रिजर्व फॉरेस्ट को हस्तांतरित किए जाने के पक्ष में था, लेकिन सरकार की मजबूत पैरवी से उसे अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
दरअसल, रिजर्व फॉरेस्ट में जो भी विकास कार्य होते हैं, सरकार को क्षतिपूर्ति के रूप में इसके एवज में सिविल की दोगुनी जमीन उसे देनी पड़ती है। एक दिन स्थिति यह बन जाती कि सिविल वन बचते ही नहीं और पूरा क्षेत्र रिजर्व फॉरेस्ट में आ जाता। रिजर्व फॉरेस्ट में ग्रामीणों को हक-हकूक नहीं दिए जाते इसलिए वे मुसीबत में
आ जाते।
इन्हीं सब परिस्थितियों को भांप कर राज्य सरकार ने सिविल एवं सोयम वन को रिजर्व फॉरेस्ट के बजाय वन पंचायतों को देने का फैसला लिया। यह जमीन धीरे-धीरे पंचायतों को दी जानी है। पंचायतों को हस्तांतरित होने वाली इस जमीन पर कैंपा प्रोजेक्ट व मनरेगा के तहत चारागाह, जड़ी-बूटी केंद्र, नर्सरी, जल संरक्षण, वनीकरण आदि कार्य किए जा सकेंगे।

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