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वैकल्पिक रास्ता न होने से इलाका दो हिस्सों में बंटा

साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास बंद फाटक पर अंडरपास बनाने को लेकर जीडीए प्रशासन गंभीर नहीं है। एक के बाद एक सैकड़ों जानों को लीलने वाले इस बंद फाटक के दोनों ओर औद्योगिक-आवासीय इलाकों में लाखों परिवार रहते हैं। एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों लोग ऐसे भी हैं जिनकी दिनचर्या में ही इस ख़ूनी फाटक को अवैध रूप से पार करना शामिल है। यानी जान जोखिम में डालने के बाद ही उनकी रोजी-रोटी चलती है। करीब ढाई साल पहले जीडीए ने इसे अपनी प्राथमिकता में शामिल कर रेलवे से अंडरपास बनाने की एनओसी ली थी लेकिन तब से वह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फाटक के दोनों ओर सघन आबादी व औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से रेलवे ओवर ब्रिज बनाना संभव न होते देख अंडरब्रिज की एनओसी ली गई थी।


कई बार स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियोंे ने प्रशासन तक आवाज पहुंचाई, लेकिन दिल्ली-हावड़ा रेलखंड के इस अतिव्यस्त बंद रेल फाटक का कुछ नहीं हुआ। रेलवे ओबी की अनुमति मिली नहीं, रेलवे ने अंडरपास की अनुमति दे दी लेकिन करीब पौने तीन वर्षों से यह भी जीडीए की फाइलों में ही कैद है।
 रेलवे से एनओसी मिलने के बाद भी पता नहीं अभी और कई वर्ष इस खूनी फाटक को इसी तरह झुक कर पार करना पड़ेगा।


सरकारी मशीनरी की लापरवाही तब है जबकि इस फाटक पर हर चौथे-पांचवें दिन  एकाध लोग जान गंवा देते हैं। दरअसल, दिल्ली-गाजियाबाद के बीच साहिबाबाद स्टेशन पर रोजाना करीब तीन सौ ट्रेनों का संचालन होता है। हर 24 घंटे में औसतन 75 से 80 मालगाड़ी भी यहां से गुजरती हैं। दिल्ली-गाजियाबाद के बीच दिनोंदिन रेल ट्रैफिक के बढ़ते दबाव के कारण ही रेलवे ने बीते कई सालों से अतिव्यस्त खूनी फाटक को बंद कर वहां से गेटमैन तक को हटा दिया। अब छह माह से जाली और लगा दी गयी है। लेकिन लाइन के दोनों ओर रहने वाले आम लोगों के लिए सोचा तक नहीं गया। रेल फाटक बंद रहने से साहिबाबाद का इलाका दो हिस्सों में बंटा है। औद्योगिक क्षेत्रों के अलावा रेल खंड के दोनों ओर हजारों मजदूरों का पूरे दिन आना-जाना होता है। हर साल लगभग सौ के करीब निदरेष मजलूमों की जान चली जाती है। लेकिन जीडीए को सुध नहीं आती।

खूनी फाटक पर हुए कई आंदोलन
सीआईपीएम के सचिव बृजेश सिंह का कहना है कि इलाके के लोग इसे खूनी फाटक के रूप में जानते हैं। हर सप्ताह खूूनी फाटक पर तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में एक-दो लोग को जान से हाथ धो देते हैं। पिछले पांच सालों में सैकड़ों मजदूरों, ठेली-रिक्शे वालों एवं निरीह मजलूमों की जान जा च़ुकी है। खूनी फाटक पर अंडरपास या ओवरब्रिज बनाने को लेकर हर साल फाटक पर ही धरना-प्रदर्शन होता है। रेलवे के डीआरएम से कमिश्नर तक को वैकल्पिक रास्ते के लिए लिखा जा चुका है। रेल मंत्री लालू प्रसाद के जमाने से ही ज्ञापन दिया गया, इस वर्ष भी तीन बार प्रदर्शन कर रेल प्रशासन को ज्ञापन दिया गया। लेकिन जीडीए प्रशासन रेलवे से अनुमति मिलने के बाद भी वषों से फंड का रोना रोकर निर्माण शुरू नहीं कर रहा है, जबकि इस बंद फाटक से रोजाना करीब 50 से 60 हजार लोग आते-जाते हैं।

रेल यात्राी संघ भी है संघर्षरत
रेल यात्राी संघ की मांगों में भी साहिबाबाद स्टेशन से सटे इस बंद फाटक पर अंडरपास शामिल है। संघ के अध्यक्ष सुरेश शर्मा एवं सचिव अनीता बाली का कहना है वे लोग खुद रोजाना साहिबाबाद स्टेशन से आते-जाते हैं। रोजाना बंद फाटक पर अवैध रूप से पैदल व दोपहिए वालों का आना-जाना रहता है लेकिन उनक ी मजबूरी है। अनीता बाली का कहना है कि तीन वषों से यह मुद्दा उठा रखा है। कई मर्तबा रेल मंत्रलय में भी रखा गया, एनओसी मिलने के बाद अब तो गेंद जीडीए के पाले में हैं,स्थानीय प्रशासन को जनहित के इस ज्वलंत मुद्दे को प्राथमिकता से लेना चाहिए।

क्या कहते हैं अधिकारी- जीडीए उपाध्यक्ष एनके चौधरी का कहना है कि फिलहाल उनके संज्ञान में यह मामला नहीं लाया गया है, लेकिन अगर रेल मंत्रलय से अंडरपास के निर्माण के लिए एनओसी मिल गई है तो निर्माण जरूर होगा, इस दिशा में वे अब विचार करेंगे। इंजीनियरिंग विभाग से फाइल मंगाकर देखेंगे।
क्या कहते हैं लोग-
राजकुमार सिंह  का कहना है कि साहिबाबाद के बंद फाटक पर अंडरपास का निर्माण जरूरी है, जल्दी ही इसपर काम शुरू करना चाहिए।

स्थानीय पार्षद-रश्मि गुप्ता का कहना है कि बंद फाटक की वजह से पूरा इलाका दो हिस्सों में बंट गया है। हादसे पर हादसे होते रहते हैं, लेकिन आम समस्या की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। अंडरपास बन जाने से यह रास्ता बहुत उपयोगी हो जाएगा।

प्रदीप चतुर्वेदी-मोहन नगर से साहिबाबाद व साइट फोर झंडापुर आने-जाने का यही मेन रास्ता है लेकिन फाटक बंद होने से जबरदस्त परेशानी होती है।

पंकज शिशौदिया-अंडरपास न होने की वजह से यहां आए दिन हादसे में जानें जाती हैं। लेकिन जीडीए का ध्यान इस तरफ नहीं जाता इसे तुरंत बनाना चाहिए। 

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