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प्यार करने की सजा मिली मौत

एक किशोर नादानी में नाबालिग लड़की से दिल लगा बैठा। मगर लड़की का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। दोनों नाबालिग घर से भाग गए। लड़की के परिवार ने किशोर के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया। इसी बीच दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए। किशोर को हिरासत में ले लिया गया। जबकि लड़की को उसके परिवार को सौंप दिया गया। किशोर पर अपहरण व बलात्कार का आरोप लगा। परन्तु किशोर जब जमानत पर बाहर आया, तो 11 दिन बाद उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। चार महीने पुराने हत्या के इस मामले में अदालत ने ऑनर किलिंग की आशंका जाहिर की है। अदालत ने हत्या के इस मुकदमें में पीड़िता और उसके पिता के खिलाफ विशेष जांच के आदेश देते हुए तफ्तीश अपराध शाखा को सौंप दी है। साथ ही शाख को हिदायत दी है कि मामले की जांच एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी से ही कराई जाए।

अदालत ने इस मामले में आनन्द विहार थाना पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि पुलिस ने जानबूझ कर महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया है। यहां तक की किशोर की हत्या के पीछे बलात्कार पीड़िता और उसके पिता का हाथ होने के नजरिये से तफ्तीश ही नहीं की गई। जबकि किशोर का परिवार लगातार किशोरी और उसके परिवार पर हत्या का आरोप लगाता आ रहा है। अब अदालत ने इस मामले में शाखा से  27 सितम्बर को प्रगति रिपोर्ट तलब की है।

पेश मामले के अनुसार 17 वर्षीय राम(बदला हुआ नाम) के खिलाफ विवेक विहार थाने में अपहरण व बलात्कार की प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले में जमानत पर बाहर आने के 11 दिन बाद उसकी हत्या हो गई। इस मामले में मृतक राम की बहन ने दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता कमल कान्त शर्मा के मार्फत अदालत में 156(3) के तहत याचिका दायर की। मृतक किशोर की बहन का कहना था कि पुलिस ने जानबूझकर शुभा और उसके पिता को हत्या के इस मामले में आरोपी नहीं बनाया है। जबकि इस बात के पर्याप्त सबूत उनके पास मौजूद हैं कि राम की हत्या पीड़िता और उसके पिता के कहने पर ही की गई है।


24 नवंबर 2009: किशोर के खिलाफ अपहरण व बलात्कार का मुकदमा हुआ दजर्।
30 अप्रैल 2010: किशोर को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से मिली जमानत।
12 मई 2010: किशोर को पीड़िता के पिता के एक जानकार घर से बुलाकर ले गए।
13 मई 2010: किशोर को चाकुओं से गुदा व कुचला शव कड़कड़डूमा के सीबीडी ग्राउंड से बरामद हुआ।
14 मई 2010: किशोर की हत्या के मामले में आनन्द विहार थाने में मुकदमा हुआ दजर्।

‘शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा पेश दस्तावेजी सबूतों को यदि सही हैं, तो मामला ऑनर किलिंग का हो सकता है। एक तो किशोर की हत्या, दूसरा ऑनर किलिंग का आशंका इन दोनों ही दृष्टिकोणों से गहन छानबीन की आवश्यकता है, लिहाजा जांच वरिष्ठ संस्था द्वारा ही की जानी चाहिए।’ राकेश पंड़ित, एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट(कड़कड़डूमा कोर्ट)

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