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पुरुषप्रधान बॉलीवुड में जगह बनातीं महिला निर्देशक

पुरुषप्रधान बॉलीवुड में जगह बनातीं महिला निर्देशक

बॉलीवुड को हमेशा से पुरुषप्रधान उद्योग माना जाता रहा है लेकिन महिला निर्देशिकाओं के लिए अब यह कोई अनजान नहीं रह गया है। अनुशा रिज़्वी की 'पीपली लाइव' और राजश्री ओझा की 'आयशा' की सफलता बताती है कि अब महिलाएं कैमरे के पीछे जाकर बखूबी काम कर रही हैं और अपनी जगह भी बना रही हैं।

ओझा ने कहा कि यह महिला निर्देशक होने की बात नहीं है बल्कि अपने विचारों को निर्देशित करने की बात है। मुझे देखिए, मैं फिल्मी दुनिया के किसी परिवार से नहीं हूं। खुद को साबित करना एक चुनौती थी लेकिन वास्तव में मेरे सामने कोई परेशानी नहीं थी। मुझे उन्हीं परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनका किसी भी निर्देशक को करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मैंने अमेरिका में पहले से ही काफी काम किया था इसलिए मेरे लिए मुद्दा यह था कि मैं भारत में कैसे काम करती हूं, लेकिन यह सब तो फिल्मोद्योग का हिस्सा है। यह लिंग केंद्रित नहीं है। ओझा की 'आयशा' जेन ऑस्टेन के ब्रिटिश उपन्यास 'एम्मा' पर बनी फिल्म है। इसमें सोनम कपूर और अभय देओल ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

बॉलीवुड में पीछे मुड़कर देखें तो कुछ मुट्ठीभर महिला निर्देशक ही अपनी जगह बना पाई हैं। इनमें सई परांजपे, कल्पना लाज़मी, अपर्णा सेन, तनुजा चंद्रा, दीपा मेहता, मीरा नायर और गुरिंदर चड्ढ़ा शामिल हैं। वैसे नई पीढ़ी में मेघना गुलज़ार, फरहा खान, रीमा काग्टी, सोनी तारापोरवाला, लीना यादव, पूजा भट्ट, भावना तलवार और ज़ोया अख्तर जैसी महिला निर्देशक सामने आई हैं।

अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'फिराक' के लिए लोकप्रियता हासिल कर चुकी अभिनेत्री-निर्देशिका नंदिता दास कहती हैं कि जब आप निर्देशन करते हैं तो खुद को एक महिला के तौर पर नहीं देखते हैं। आप केवल निर्देशन करते हैं। महिलाओं को किसी भी व्यवसाय में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसा भी होता है कि लोग उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं लेकिन जब आप एक फिल्म में काम कर रहे होते हैं तो अन्य पहलुओं पर ध्यान नहीं देते।

पत्रकार से निर्देशक बनी रिज्वी ने कहा कि मुख्य बात यह है कि महिलाओं को किसी भी व्यवसाय में बहुत कुछ झेलना पड़ता है। यह शायद जान-बूझकर या बिना सोचे-समझे नहीं होता है लेकिन आपको इसे स्वीकारते हुए इससे लड़ना चाहिए। यह एक सामाजिक समस्या है। यह किसी एक उद्योग की परेशानी नहीं है लेकिन जब आपको इस तरह से लक्ष्य किया जाता है तो यह विशुद्ध रूप से वर्चस्व का समीकरण होता है।

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