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दो टूक (शुक्रवार, 10 सितंबर 2010)

भूमि अधिग्रहण पर सोनिया गांधी का बयान सरकार चलानेवालों के लिए नसीहत है। कथित विकास के नाम पर आनेवाली पीढ़ियों के हिस्से की संपदा चट करने की संहारक प्रवृत्ति कतई उचित नहीं कही जा सकती। आबादी बढ़ने से वैसे ही कृषि योग्य जमीन कम होती जा रही है। बिना विचारे जमीन का अधिग्रहण होता रहा तो आगे अन्न उपजाने और खाने के लाले पड़ने तय हैं। जिन देशों में आबादी कम है, वहां विकास का यह मॉडल तो ठीक हैं। लेकिन, हमारे यहां तो आबादी विशाल है और लगभग दो तिहाई आबादी खेती से ही जीवन यापन करती है। ऐसे में यहां अन्न निर्भरता पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ में किसानों को वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना उनके परंपरागत आधार से वंचित करना भी ठीक नहीं।

 

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