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पाक में बाढ़ से बढ़ सकता है बासमती चावल निर्यात

भारत के बासमती चावल का निर्यात अक्टूबर से शुरू होने वाले 2010-11 के सत्र में नौ प्रतिशत बढ़कर 35 लाख टन हो जाने की संभावना है। बाढ़ प्रभावित पाकिस्तान में फसलों को हुई क्षति के कारण भारतीय सुगंधित चावल की मांग बढ़ सकती है। एक उद्योग संगठन ने यह जानकारी दी है।

अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष विजय सेतिया ने बताया कि इसी माह समाप्त होने जा रहे चालू विपणन वर्ष में भारत के द्वारा 32 लाख टन चावल का निर्यात किये जाने का अनुमान है। वर्ष 2010-11 में इसकी खेप बढ़कर 35 लाख टन हो सकती है।

उन्होंने कहा कि बासमती चावल का निर्यात पिछले वर्ष के मुकाबले निश्चित तौर पर अधिक होगा, क्योंकि पड़ोसी देश में बाढ़ के कारण इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। पाकिस्तान में बाढ़ के कारण बासमती फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में कम चावल उत्पादन के कारण भारतीय चावल की मांग बढ़ सकती है।

सेतिया ने कहा कि घरेलू आपूर्ति भी अधिक होने की उम्मीद है, क्योंकि इस सुगंधित चावल का उत्पादन पिछले वर्ष के 45 लाख टन के उत्पादन से अधिक होने की संभावना है। इसकी खेती के रकबे में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। भारतीय निर्यातक बासमती चावल का निर्यात 900 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य पर कर रहे हैं।

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