DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राष्ट्रमंडल खेलों में आसान नहीं होगी भारतीय तैराकों की राह

राष्ट्रमंडल खेलों में आसान नहीं होगी भारतीय तैराकों की राह

राष्ट्रमंडल खेलों में पहले पदक की उम्मीद लगाए बैठे भारतीय तैराकों की राह आसान नहीं होगी क्योंकि उन्हें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा जैसी दिग्गज टीमों का सामना करना है जबकि इन खेलों से पहले तीन तैराकों के डोपिंग में फंसने का भी टीम के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
    
भारतीय तैराक अब तक राष्ट्रमंडल खेलों में पदक से वंचित रहे हैं और तीन से 14 अक्टूबर तक होने वाले दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भी पदक जीतना उसके तैराकों के लिए एवरेस्ट चढ़ने के समान होगा क्योंकि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा का पारंपरिक तौर पर इन खेलों की तैराकी स्पर्धा में वर्चस्व रहा है।
    
राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का सबसे बड़ा दांव रेहान पोंचा, संदीप सेजवाल और वीरधवल खाड़े हैं लेकिन अन्य तैराकों से पदक की उम्मीद कम है। इसके अलावा अगर भारत को अपना दावा मज़बूत करना है तो टीम को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए चुनी गई तैराकी टीम के दो सदस्यों रिचा मिश्रा और ज्योत्सना पंसारे सहित तीन तैराकों के डोपिंग में फंसने के विवाद से भी उबरना होगा।
    
भारत के शीर्ष तैराकों पोंचा, सेजवाल और खाड़े को राष्ट्रमंडल खेलों में पदक की उम्मीद है लेकिन इसके लिए इन तीनों तैराकों को ही अपनी सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन करना होगा। इन तीनों ने ही पिछले दो साल में बेजोड़ प्रदर्शन किया है और इस तिकड़ी के नाम कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं। इन तीनों ने ही अपने निजी व्यक्तिगत समय में भी सुधार किया जिससे इनका दावा मज़बूत होता है।

खाड़े और सेजवाल सहित भारत के पांच तैराक हाल में विदेश में दो महीने का परीक्षण लेकर लौटे हैं जबकि पोंचा पिछले काफी समय से लॉस एंजिलिस स्थित सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में कोच डेविड सेलो के साथ अभ्यास में जुटे हैं। विदेशों में अभ्यास से भारतीय तैराकों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है और वे विराधियों की चुनौती को तैयार हैं।
     
अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में 25 से अधिक पदक जीत चुके पोंचा ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में उनका सपना पदक जीतना है और वे इसके लिए भरसक प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि मेरा सपना पदक जीतना है और घरेलू दर्शकों के सामने मुझे मदद भी मिलेगी। मैं और बेहतर टाइमिंग निकालने की कोशिश कर रहा हूं। मैं राष्ट्रमंडल खेल और एशियाड में शीर्ष पांच में ज़रूर रहना चाहूंगा। लंदन ओलंपिक 2012 भी मेरा सपना है लेकिन मैं दीर्घकालिन लक्ष्य तय नहीं करता।
     
अमेरिका में तैयारी को बोनस बताते हुए उन्होंने कहा कि मैंने पानी में अपना पावर इनपुट बेहतर किया है। टाइमिंग पहले से अच्छी आ रही है। मैं 200 मीटर फ्लाई और व्यक्तिगत मेडले के लिए भी अभ्यास कर रहा हूं।

इस बीच कोच निहार अमीन ने कहा कि तीन खिलाड़ियों के डोपिंग में विफल रहने का अन्य तैराकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जयपुर में हाल में समाप्त हुई 64वीं राष्ट्रीय तैराकी चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ महिला तैराक चुनी गई रिचा और ज्योत्सना राष्ट्रमंडल तैराकी टीम में शामिल थी।
    
अमीन ने कहा कि डोपिंग मामला ज़ाहिर तौर पर शर्मनाक है लेकिन इसका राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अभ्यास कर रहे तैराकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रिचा और ज्योत्सना से वैसे भी राष्ट्रमंडल खेलों में पदक की उम्मीद नहीं थी।

भारत के शीर्ष तैराकों में शुमार खाड़े भी अन्य देशों के तैराकों को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उनका मानना है कि भारतीय तैराक इन खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे। खाड़े राष्ट्रमंडल खेलों में तैराकी की चार स्पर्धाओं 50 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर फ्रीस्टाइल, 50 मीटर बटरफ्लाई और 100मी बटरफ्लाई में हिस्सा लेंगे।
     
बेंगलूर में तैयारियों में जुटे खाड़े ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हमारी तैयारियां अंतिम दौर में हैं। इन खेलों में स्वर्ण पदक जीतना थोड़ा मुश्किल ज़रूर है लेकिन मैं इसके लिए पूरी कोशिश करूंगा। कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में 29 अगस्त 1991 को जन्मे इस तैराक ने कहा कि मुझे लगता है कि घरेलू दर्शकों की उपस्थिति से सभी भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा जिसका असर प्रदर्शन पर भी पड़ेगा।
     
सेजवाल ने भी उम्मीद जताई कि भारत ना सिर्फ इन खेलों में अपना पहला पदक जीतने में सफल रहेगा बल्कि तैराकी में शीर्ष पांच में भी जगह बनाएगा। इन तीनों शीर्ष तैराकों के अलावा रोहित हवलदार, एपी गगन, एरोन एग्नेल डिसूज़ा, एमबी बालाकष्णन, मंडार दिवासे, जेपी अर्जुन, पुनीत राणा, जे अग्निश्वर, प्रवीण टोकस और अंशुल कोठारी के अलावा पूजा अल्वा, ताल्शा प्रभु, सुरभि तिप्रे और आरती घोड़पड़े भारतीय चुनौती पेश करेंगी।
    
ऑस्ट्रेलिया ने अभी तक 237 स्वर्ण, 170 रजत और 150 कांस्य पदक जीते हैं। कनाडा के 103 स्वर्ण, 109 रजत और 110 कांस्य पदक जीते हैं जबकि इंग्लैंड ने 77 स्वर्ण, 108 रजत और 118 कांस्य पदक अपने नाम किए हैं। राष्ट्रमंडल खेलों की तैराकी स्पर्धा में अभी तक 465 स्वर्ण, इतने ही रजत और कांस्य पदक दिए जा चुके हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:राष्ट्रमंडल खेलों में आसान नहीं होगी भारतीय तैराकों की राह