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आउट डोर फौगिंग से कर्मचारियों ने किया इंकार

कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए शहर के लोगों को अपने स्तर पर तैयार रहना होगा। मलेरिया विभाग के कर्मचारियों ने आउट डोर फौगिंग करने से इंकार कर दिया है। इससे विभाग की परेशानियां बढ़ गई हैं। आरोप है कि इससे निकलने वाली धूएं से विभाग के करीब सात कर्मचारी गंभीर रोगों की चपेट में आ गए हैं। इससे निपटने के लिए विभाग की ओर से कोई विशेष सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रहीं। स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए नाराज कर्मचारी अब दवा छिड़ने से बचने लगे हैं। संभावित मरीजों की बढ़ती तादाद और ऊपर से राष्ट्रमंडल खेल के समय ऐसे हालात शहर की सेहत बिगाड़ सकते हैं।


गौरतलब है कि जिले में डेंगू के पिछले एक महीने में छह मरीजों की पहचान की गई है। जबकि 118 संभावित मरीजों की पहचान की गई है। इसके बाद मलेरिया विभाग द्वारा आउटडोर फौगिंग के निर्देश दिए गए। इसे शनिवार से शुरु किया था। बुधवार तक जवाहर कालोनी, पवर्तीय कॉलोनी, आनंगपुर गांव, बल्लभगढ़ और अजरौंदा गांव में फौगिंग कराई गई। इसके लिए छह टीमें बनाई गई थीं। प्रत्येक टीम में तीन से चार सदस्य थे। टीम के सभी सदस्यों ने फौगिंग करने से इंकार कर दिया। इसके बाद ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ से कर्मचारियों को बुलाया गया है। उन्होंने भी फौगिंग करने इंकार कर दिया है। इनकी जगह अब अप्रशिक्षित कर्मचारियों को तैनात करने का निर्णय लिया गया है।
अधिकारी कर्मचारी पिछले कई वर्षो से काम कर रहे हैं। इनका कहना है कि फौगिंग के दौरान पेट्रोल, डीजल, पैराथ्रम और मैलायोन टेक्निकल का प्रयोग करते है। फौगिंग के दौरान इसका मिक्सचर तैयार हो जाता है। जो फेफड़े के लिए काफी खतरनाक है। इसकी चपेट में आने से सात कर्मचारी सांस की बीमारी से परेशान हैं। इसके बाद इन लोंगों ने आउटडोर फौगिंग से इंकार कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग की ओर से फौगिंग के लिए न तो रिस्क भत्ता मिलता और नहीं इंश्योरेंश कराया जाता। आउट डोर फौगिंग से निकलने वाली धूआं से बचाव के लिए मात्र एक साफा दिया जाता। जो इस रोग से बचाव के लिए पर्याप्त नहीं है।

विभाग में बीमार कर्मचारी
- विजय सिंह, वीर सिंह, ज्ञान चंद्र, खेमचंद्र, महेंद्र, नवल कुमार और सरीफ अहमद आदि

बचाव के लिए क्या देता है विभाग
- गुड़, चना, साफा, साबून और मॉस्क

क्या कहते है विशेषज्ञ
- फागिंग के दौरान धूआं वातावरण में फैल जाता है
- इससे मच्छरों से कुछ देर की लिए राहत मिलती है
- सांस के माध्यम से खतरान गैस फेंफड़े में
- लगातार सूंघने से खांसी, गला खराब और फेफडा कमजोर हो जाता है।
- कुछ लोगों यह बीमारी जल्द ठीक नहीं होती
 
  
मलेरिया अधिकारी डॉ. ओपी मेहता: कुछ कर्मचारी इसका विरोध कर रहे है। इनके जगह दूसरे कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है। इनमें से कुछ कर्मचारी प्रशिक्षित है।

इन क्षेत्रों में होगी आउट डोर और इंडोर फौगिंग
-सेक्टर- 3, 9,14, 15, 16, 23
- एनएच एक, दो, तीन, चार व पांच
- जवाहर कालोनी
- पवर्तीय कॉलानी
 -सुंदर कालोनी
- न्यू न्ांगला रोड
- शिवदुर्गा कालोनी
-विद्युत कालोनी
- सराय ख्याजा
-इंड्रस्ट्रीयल एरिया 31 बी
- बल्लभगढ़ आदि

पेट्रोल, डीजल, पैराथ्रम और मैलायोन टेक्निकल के प्रयोग से
- दवा के संपर्क में आने से एलर्जी, अस्थामा
- लगातार धूए के सेवन से फेफड़े पर असर
- प्रदूषण
-  आंखों में जलन और रेगूलर फौगिंग करने से कैंसर की आशंका

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