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प्री-पेमेंट

होम लोन लेने वालों को लग सकता है कि लोन वक्त से पहले चुकाने के बावजूद उसे दंड के तौर पर प्री-पेमेंट पेनल्टी देनी पड़ती है, जबकि लोन देने वाले इसे अपने नुकसान की थोड़ी-सी भरपाई ही बताते हैं।
क्या है प्री-पेमेंट: प्री-पेमेंट से अभिप्राय अपने लोन का भुगतान लोन की तय अवधि पूरी होने से पहले कर देना है। यह एकमुश्त या छोटी-छोटी कई किस्तों में किया जाता है। आप लोन की कुछ रकम भी चुका सकते हैं। इसके बाद बैंक आपको ईएमआई की नई रकम और लोन खत्म होने की नई अवधि के बारे में बता देगा।
प्री-पेमेंट पेनल्टी: होम लोन लंबी अवधि के होते हैं। इस वजह से ब्याज के मद में काफी रकम वसूली जाती है। यदि पूरा लोन समय से पहले चुक जाए तो बैंक को नुकसान झेलना होगा। इसी तर्क के साथ बैंक प्रीपेमेंट पर पेनल्टी वसूलते हैं। हालांकि इस बारे में आज तक भी एक जैसे नियम नहीं बनाए गए हैं। कई फाइनेंस कंपनियां भुगतान के बारे में ग्राहक के पिछले रिकॉर्ड और प्रीपेमेंट की स्थितियों को देखकर नियम तय करती हैं। गर कर्जदार अपनी जमा पूंजी में से प्रीपेमेंट करता है, तो कुछ बैंक पेनल्टी नहीं वसूलते। हालांकि इस जमा पूंजी का ठोस सुबूत देना होता है। कर्जदार सस्ती ब्याज दर की वजह से फाइनेंसर बदलता है, तो उसे कर्ज की बकाया रकम का दो से तीन फीसदी पेनल्टी के तौर पर जरूर चुकाना होता है।
प्रक्रिया जानिए: अगर आप लोन की अवधि खत्म होने से पहले पूरा प्री-पेमेंट करना चाहते हैं, तो सबसे पहले क्लोजिंग कोटेशन लेनी होगी। यानी आपको यह पता करना होगा कि कितना लोन और ब्याज बकाया है और लोन अकाउंट बंद करने के लिए आपको कितनी रकम चुकानी होगी? आपको बैंक को वह तारीख भी बतानी होगी, जब आप लोन चुकाएंगे। अगर आपने पोस्ट डेटेड चेक दिए हैं और आप लोन की प्रीपेमेंट करना चाहते हैं, तो इस बारे में पहले से सूचित करें ताकि बैंक आपको चेक और दूसरे दस्तावेज लौटा सके।

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