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इतिहासकारों ने किया टीले का प्रारंभिक सर्वेक्षण

गाजियाबाद की धरती अपने सीने में कई प्राचीन सभ्यताओं के अवशेष समाए हुए है। मोदीनगर के सादाबाद जखैवा गांव के प्रारंभिक सर्वेक्षण में इतिहासकारों को पहली ईसवीं शताब्दी से लेकर मुगल काल तक के प्राचीन अवशेष मिले हैं। इनमें मृदभांड, मटके, सुराही, दीपदान और माला के मनके शामिल हैं। इतिहासकारों ने इस टीले की खुदाई के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को प्रस्ताव भेजा है।


मोदीनगर क्षेत्र के गांवों में ऐतिहासिक सभ्यताओं के रहस्य समाए हुए हैं। समय-समय पर यह रहस्य उजागर होते रहते हैं। इन रहस्यों की खोज के लिए एमएम पीजी कॉलेज मोदीनगर के इतिहासकार डॉ. कृष्णकांत शर्मा, कुशलपाल-तेजपाल त्यागी कॉलेज मुरादनगर के डॉ. अवनीश त्यागी, दिल्ली के डॉ. विनोद यादव और शोध छात्र आदीप शर्मा ने अबूपुर गांव के पास स्थित सादाबाद जखैवा के टीले का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया। राजस्व रिकार्ड में यह नाआबाद गांव के रूप में दर्ज है। यह गांव 27 बीघे का है। सर्वेक्षण के दौरान टीले से इतिहासकारों को कई सभ्यताओं के अवशेष प्राप्त हुए। जिनमें पहली शताब्दी ईसवी से लेकर मुगल काल तक के अवशेष हैं। सिनौली बागपत में सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई के क्षेत्रीय संयोजक रहे डॉ. कृष्णकांत ने बताया कि कुषाण, गुप्त, राजपूत और मंगल काल के मृदभांडों के अवशेष मिले हैं। इनमें मटके, सुराही, दीपदान, माला के मनके और कुछ कौड़ी भी मिली है। इससे पता चलता है कि इस इलाके में लगातार सभ्यताएं आबाद रही हैं। यह क्षेत्र 2000 साल पहले से आबाद था। हिंडन नदी वर्तमान में इस क्षेत्र से आठ किलोमीटर दूर है। मोदीनगर का क्षेत्र वैसे भी प्राचीन है। इस क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक सभ्यताओं के अवशेष मिलते रहे हैं।

पहले भी मिले हैं अवशेष
डॉ. कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि हिंडन नदी के किनारे पहले भी कई सभ्यताएं मिल चुकी हैं। मेरठ के आलमगीरपुर में सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष मिल चुके हैं। इसी तरह से सुराना भी प्राचीन सभ्यताओं का गढ़ रहा है। अल्लाहपुर गांव में भी सर्वेक्षण के दौरान महाभारतकालीन सभ्यता के चित्रित धूसर मृदभांड मिले हैं। उन्होंने बताया कि सादाबाद जखैवा में खुदाई कराने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

संग्रहालय में रखे जाएंगे अवशेष
एमएम कॉलेज मोदीनगर के प्राचार्य डॉ. आरसी लाल ने बताया कि मोदीनगर व आसपास के क्षेत्रों में मिल रहे प्राचीन सभ्यताओं के अवशेषों को रखने के लिए संग्रहालय बनाया जा रहा है। इन अवशेषों को संग्रहालय में रखा जाएगा, ताकि उन्हें संजो कर रखा जा सके। इसके लिए जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा।

प्राचीन शिवलिंग भी है
जिस टीले पर इतिहासकारों ने खुदाई की, वहां पर एक प्राचीन शिवमंदिर भी बना हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार, मंदिर के शिवलिंग की बनावट काफी प्राचीन है। यह शिवलिंग पुरामहादेव मंदिर के शिवलिंग की शैली का ही बना हुआ है, जो पौराणिक है।

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