DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अपनी समस्या है यार

वह बॉस के कमरे से निकले, तो उलझे हुए थे। अपनी समस्या लेकर वहां गए थे। लेकिन उसे और बढ़ा कर चले आए थे। सुबह से ही दबाव में थे। अब तो तनाव भी होने लगा था। वह सोचने लगे थे कि किसकी मदद ली जाए?
मशहूर साइकोलॉजिस्ट पॉल सुलीवन का कहना है कि हमें किसी भी हालात से निकलने के लिए जानकारियां चाहिए। समस्याएं सुलझाने के लिए मदद चाहिए। लेकिन हम अपनी समस्याओं के हल की ओर खुद ही पहुंचते हैं। उन्होंने लीमन ब्रदर्स के ढहने के बाद एक किताब लिखी, ‘द आर्ट ऑफ थिंकिंग क्लीयरली अंडर ग्रेट प्रेशर।’ यह किसी भी दबाव से उबरने में मददगार हो सकती है। जब हम पर दबाव आता है, तब उससे निकलने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। दबाव सबसे पहले हमारी सोच पर ही असर डालता है। हम परेशान होने लगते हैं। हमारे सोचने की ताकत बिखरने लगती है। हम ढहे हुए से महसूस करते हैं। असुरक्षा की भावना हमारे भीतर घर करने लगती है।
पॉल सुलीवन का कहना हैं कि सबसे पहले हमें उस दबाव को लाने वाले हालात को जानना चाहिए। उन हालात को जानने के लिए हमें कुछ जानकारियों की दरकार होगी। उसके बाद उससे निपटने के लिए किस-किस की मदद चाहिए, वह देखना चाहिए। हम जानकारियां और मदद तो हासिल कर लें। लेकिन यह नहीं सोचना चाहिए कि उसी से हमारी समस्याएं हल हो जाएंगी। दरअसल, तमाम जानकारियों और मदद के अलावा भी हमें कुछ करना है। हमें अपने भीतर जाकर कुछ खंगालना है। उस समस्या का हल भीतर पैठ कर ही निकालना है। आखिर समस्या हमारी है। उसके हल में कोई मददगार हो सकता है, लेकिन उसे हल हमें ही करना है।

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अपनी समस्या है यार