DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हाफ ईयरली एग्जाम, हल्के में मत ले यार

हाफ ईयरली एग्जाम, हल्के में मत ले यार

‘जो बच्चे हाफ ईयरली एग्जाम में अच्छा परफॉर्म कर जाते हैं, वे किसी हद तक दूसरों के मुकाबले तनावमुक्त रहते हैं। उन्हें पता है कि इस एग्जाम में अच्छा करने के बाद उनके ग्रेड सालाना परीक्षा में बेहतर होंगे। करीब 30 फीसदी वे अकेले इस एग्जाम से पाते हैं। यह एग्जाम अपने आप में बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। किसी कारणवश अगर कोई छात्र सालाना परीक्षा नहीं दे पाता और उसकी हाफ ईयरली एग्जाम की परफॉर्मेंस बेहतरीन है तो सामान्यत: वह अगली कक्षा में पहुंचा दिया जाएगा। बस, नुकसान यह होगा कि उसके ग्रेड उतने अच्छे नहीं होंगे।’
शकुंतला रावत
प्रिंसिपल, मयूर पब्लिक स्कूल
आईपी एक्सटेंशन, दिल्ली

‘आयुष, क्या तुमने मैथ्स का रिवीजन कर लिया!’ योगिता ने बुक के पन्ने पलटते हुए पूछा। ‘कहां यार, ट्रिगनोमेटरी के हाइट एंड डिस्टेंस बड़े ही कन्फ्यूजिंग हैं।’ इन दिनों तुम्हारे बीच कुछ इसी तरह की गपशप होने लगी होगी। हो भी क्यों न। अब कुछ ही दिन तो बचे हैं तुम्हारे हाफ ईयरली एग्जाम में। दोस्तो, ये एग्जाम न सिर्फ तुम्हें अभी की तैयारी का लेखा-जोखा बताएंगे, बल्कि फाइनल रिजल्ट के ग्रेड को भी बढ़ाएंगे। एकदम कूल होकर तुम इनकी तैयारी करना। देखना, तुम्हारी गिनती भी अव्वल छात्रों में होगी।

‘हाफ ईयरली एग्जाम सिर पर आ गए पता ही नहीं चला। कहां हम कॉमनवैल्थ गेम की छुट्टियों की तैयारी कर रहे थे, वहीं उससे पहले इन परीक्षाओं की तैयारी में जुटना है। हमें चिंता करने की जरूरत नहीं, हम अपने सिलेबस में पीछे नहीं हैं।’ यह कहना है चिल्ड्रन एकेडमी, गाजियाबाद के सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले विकास का। वह अधिक से अधिक ग्रेड लाने के लिए स्ट्रेटजी बना रहा है, फिक्र बिल्कुल भी नहीं कर रहा। सामान्य दिनों की तरह रोज खेलता भी है, टीवी भी देखता है और दोस्तों संग गपशप भी करता है। विकास की तरह क्वीन मैरी, मयूर विहार, दिल्ली के स्कूल में पढ़ने वाली आयुषी भारद्वाज कहती हैं, ‘हम हाफ ईयरली एग्जाम के लिए अब इतना टेंस क्यों हों। हमें तो पहले से पता होता है न कि कब-कब हमारे एग्जाम होने हैं। मुङो मैथ्स के कुछ सम परेशान करते हैं, मगर मैं अपना ज्यादा से ज्यादा टाइम इसी विषय को दे रही हूं।’ दोस्तो, तुम्हारे टीचर्स का भी यही कहना है कि अपने विषयों को कुछ ऐसे बांटों कि कमजोर विषय को अधिक समय मिले। तुम्हारे हाफ ईयरली एग्जाम बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। यानी तुमने अपनी अगली कक्षा में जाने वाले सफर का आधा रास्ता तय कर लिया है। इन परीक्षाओं से यह जानने में मदद मिलेगी कि आगे तुम्हारी स्ट्रेटजी क्या हो।

एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाला अक्षत शर्मा अपने पिछले वर्ष के हाफ ईयरली एग्जाम को कभी नहीं भूल पाता। अक्षत अपनी कक्षा का होशियार छात्र रहा। जी जान से वह अपनी परीक्षाओं की तैयारी करता। पिछले साल कक्षा 8 के हाफ ईयरली एग्जाम में उसे सभी विषयों में अव्वल ग्रेड मिले। सभी टीचर यह मान कर चल रहे थे कि अक्षत सालाना परीक्षा में यही परिणाम दोहराएगा। अक्षत उम्मीद अनुसार मेहनत भी खूब कर रहा था। परीक्षाएं शुरू होने वाली ही थीं कि उसे टाइफाइड हो गया। वह कई दिन बेड रेस्ट पर रहा। इसी वजह से वह वार्षिक परीक्षा भी न दे सका। वह मान कर चल रहा था कि उसे इसी कक्षा में अगली साल भी बैठना पड़ेगा। लेकिन परिणाम के दिन कुछ चमत्कार सा हो गया। वह आठवीं से नवीं कक्षा में पहुंच गया। दरअसल उसके टीचर्स ने उसके हाफ ईयरली रिजल्ट को ध्यान में रखकर उसे पास करने का फैसला लिया था। जब स्टूडेंट को पास करना होता है तो बहुत से स्कूल एक सैट पैटर्न को अपनाते हैं। जैसे 30-50 प्रतिशत मार्क्स हाफ  ईयरली एग्जाम के लिए जाएंगे। 100 फीसदी सालाना परीक्षा से। और कुछ प्रतिशत दोनों टर्म में हुए वीकली टैस्ट से। इसके लिए तुम्हें दिए गए प्रोजेक्ट आदि को जोड़ जब मार्क्स आते हैं, उन्हें अब ग्रेड्स में बदल दिया जाता है। हर कोई चाहता है कि उसे प्रत्येक विषय में ए प्लस ही मिले।

टाइम टेबल में ब्रेक

‘कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं पिछले कई घंटों से लगातार पढ़ रहा हूं। वाक्य को दस बार दोहराने के बाद भी दिमाग कुछ समझने को तैयार नहीं है।’ ये कह रहे हैं आरूष, जो कुछ ही दिन बाद नवीं कक्षा का हाफ ईयरली एग्जाम देंगे। वहीं दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली राइमा कहती हैं- कई बार किताब तो खुली रहती है, मगर याद कुछ नहीं होता। बस, एक ही पन्ने पर टकटकी लगाकर मैं बहुत समय नष्ट कर देती हूं। फै्रंड्स, क्या तुम्हारे साथ भी तो ऐसा ही कुछ नहीं हो रहा है। इसका मतलब एकदम साफ है कि तुमने अपने टाइम टेबल में ब्रेक्स को जगह दी ही नहीं। परीक्षा के दिनों में लिए गए ब्रेक्स हमें टेंशन फ्री रहने में मदद करते हैं। ब्रेक्स भले ही बहुत बड़े न हों, मगर ऐसे हों जो तुम्हें तारोताजा रहने में मदद करें। जैसे मम्मा से पूछो, मम्मा आप ऑमलेट, चाय-कॉफी या सैंडविच कोई भी झट से कैसे तैयार कर लेती हो। पहली बार खुद से किया गया काम आत्मविश्वास का संचार करेगा। तुम्हें पहचानना होगा कि किन एक्टिविटीज से तुम रिलैक्स होते हो। किसी के लिए अपने प्यारे डॉगी के साथ घूमना तनाव कम करता है तो कोई मनपसंद कॉमिक, कोई घर के गमलों के साथ कुछ पल बिताने में, तो कोई मनपसंद म्यूजिक सुनने में।

टेंशन को पास फटकने मत देना

दोस्तो, मनोवैज्ञानिक समीर पारिख का कहना है- ‘एग्जाम फाइनल हों, हाफ ईयरली या फिर तुम्हारा यूनिट टैस्ट। परीक्षा के वक्त परिणाम के बारे में बिल्कुल मत सोचो। ऐसा करने से परफॉर्म नही कर पाओगे और तनाव भी बढ़ता जाएगा। एग्जाम के डर को भगाने का सबसे बेहतर तरीका यही होता है कि तुम खुद के टैस्ट पेपर तैयार करो और खुद ही मार्क्स दो। 0-5 मार्क्स का एक चार्ट तैयार करो। रोज पढ़ने के साथ आउटडोर गेम्स भी खेलो। जब तुम्हें लगे कि किसी टैस्ट से पहले तनाव तुम पर हावी हो रहा है तो अपने पिछले अच्छे एग्जाम के बारे में सोचो और सकारात्मक रवैया अपनाओ। इससे तुम्हारे अंदर आत्मविश्वास में भी इजाफा होगा।’

अगर तुम्हें लगे कि आने वाले हाफ ईयरली एग्जाम तुम पर हावी हो रहे हैं और उनकी वजह से तुम अपना बेस्ट नहीं कर पा रहे हो तो स्टडी से थोड़ा हटकर लम्बी सांसें लो, खुद को यकीन दिलाओ कि सब कुछ तुम्हारी स्टडी प्लानिंग के अनुसार ही चल रहा है। यानी ऑल इज वैल।

एक स्टडी में पाया गया है कि एग्जाम से 10 मिनट पहले संगीत सुनने से तुम बच्चे अच्छा परफॉर्म कर पाते हो। एग्जाम से पहले ही क्यों, जब भी तुम्हें लगे तनाव तुम पर हावी हो रहा है तो म्यूजिक सुनकर या साथ में थिरक कर टेंशन को दूर भगा दो। अगर कभी प्रश्न-पत्र का पहला ही प्रश्न तुम्हारे होश उड़ा देता है तो घबराओ नहीं, कुछ पल के लिए आखें बंद करो और कुछ गहरी सांसें लो और शांत रहने की कोशिश करो। तुरंत अगले प्रश्न की ओर बढ़ो और हमेशा याद रखो कि घबराकर पैन रख देने से अच्छा है कि प्रश्न का जितना उत्तर तुम जानते हो जरूर लिखो। मुझे लगता है कि मैं यह काम कर लूंगा। मैं फलां काम करने की कोशिश करुंगा जैसे वाक्य हमेशा तुम्हारे तनाव को कम करते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हाफ ईयरली एग्जाम, हल्के में मत ले यार