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संभावित हड़ताल से उत्तराखंड विधानसभा में संकट की आशंका

उत्तराखंड विधानसभा के कर्मचारियों और अधिकारियों की संभावित कलमबंद हड़ताल की चेतावनी से राज्य विधान सभा में संकट पैदा हो गया है।

उत्तराखंड के कर्मचारियों और अधिकारियों ने अभी तक उत्तराखंड विधान सभा के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिये सेवा नियमावली नहीं बनने के खिलाफ आगामी 20 तारीख से कलम बंद अनिश्चित हडताल करने की चेतावनी दी है, जबकि उत्तराखंड की राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने विधान सभा का सत्र आगामी 22 सितम्बर से आहूत किया है।

विधानसभा सूत्रों ने बताया कि यदि कर्मचारियों और अधिकारियों की कलमबंद हड़ताल होती है तो इससे संकट उत्पन्न हो जायेगा, क्योंकि संविधान के अनुसार विधान सभा का सत्र छह महीने के भीतर बुलाना आवश्यक होता है और उत्तराखंड विधान सभा का सत्र गत 26 मार्च को समाप्त हो गया था और उसके बाद इसे अभी तक आहूत नहीं किया गया है। इसलिए इसे हर हालत में 25 सितम्बर के पहले आहूत हो ही जाना चाहिए।

उत्तराखंड विधानभा कर्मचारी कल्याण संगठन के महासचिव सुनील हरिव्यासी ने बताया कि पूरे देश में उत्तराखंड विधान सभा ही एक मात्र विधायी संस्था है, जहां दस वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक सेवा नियमावली नहीं बन पायी है। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों में जबर्दस्त रोष है।

अधिकारियों और कर्मचारियों ने सोमवार को अभूतपूर्व कदम उठाते हुए उत्तराखंड सरकार के ढुलमुल रवैये के खिलाफ न केवल सभा परिसर में धरना दिया था बल्कि कार्य का बहिष्कार भी किया था, जिससे परिसर में अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी थी।

विधानसभा के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने सेवा नियमावली को सरकार द्वारा पिछले एक वर्ष से लटकाये जाने के खिलाफ परिसर में नारेबाजी भी की और सरकार विरोधी नारे भी लगाये। कर्मचारियों और अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान अध्यक्ष हरबंस कपूर ने कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा नियमावली के लिये उच्चाधिकार प्राप्त एक समिति का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट एक वर्ष पूर्व ही सरकार को दे दी थी।

धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने कहा कि गत एक वर्ष से उस रिपोर्ट को सचिवालय के लिपिकों ने दबा रखा है और उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके चलते पिछले दस सालों से कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा नियमावली नहीं बन सकी है। आधिकारियों और कर्मचारियों ने मंगलवार से अपनी मांगों के समर्थन में काली पट्टी लगाकर काम पर आना शुरू कर दिया है और आगामी 22 तारीख से अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल करने की खुली चेतावनी दी है।

हरिव्यासी ने बताया कि यह एक दुखद पहलू है कि विशेषाधिकार प्राप्त विधानसभा के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिये अभी तक सेवा नियमावली नहीं बन पाई है और इसमें लिपिक स्तर पर अडंगा लगाया जा रहा है तथा आला अफसर कुछ भी कारगर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को तुरंत दखल देकर इस समस्या का निवारण करना चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिये कि विधायिका के कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा नियमावली में अनावश्यक रूप से देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी दंडित हों।

विधानसभा में कर्मचारियों और अधिकारियों की कोई यूनियन नहीं है और सभी कर्मचारियों और अधिकारियों ने स्वस्फूर्त यह कदम उठाया है। ऐसे में यदि इसका समय रहते निराकरण नहीं हुआ तो राज्य में अभूतपूर्व संकट खड़ा हो सकता है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे प्रमुख बात यह है कि विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर इन दिनों नैरोबी में एक बैठक में भाग लेने गए हुए हैं और वह आगामी 20 तारीख की अपराहन लौटेंगे। सत्र 22 तारीख से बुलाया गया है। और तो और विधानसभा के सचिव महेश चंद्र को 13 तारीख को नैरोबी जाना है और वह भी 20 को ही लौटेंगे। ऐसे में कलमबंद हड़ताल की अवस्था में विधान सभा में अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न होने तथा अभूतपूर्व संकट पैदा होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

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  • Web Title:संभावित हड़ताल से उत्तराखंड विधानसभा में संकट की आशंका