DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक (08 सितंबर, 2010)

लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है तो उसके माध्यम भी अनेक हैं। लेकिन इस स्वतंत्रता की सीमा भी है। आपको सड़क पर अपनी छड़ी घुमाते चलने का अधिकार है लेकिन आपका यह अधिकार वहां खत्म हो जाता है जहां से दूसरे व्यक्ति की नाक शुरू होती है।

मजदूर संगठनों को अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल का अधिकार है लेकिन इन संगठनों को यह भी सोचना चाहिए कि सरकार के खिलाफ होने वाली इस हड़ताल की मार उल्टे जनता पर आ पड़ती है। आजादी के दौरान सफलता पूर्वक अपनाए गए इस तरीके पर स्वतंत्र भारत में फिर से सोचने और इसका विकल्प नए सिरे से तलाशने की जरूरत है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक (08 सितंबर, 2010)