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लोन लेकर घी पीते रहो

वह जो मसल मशहूर है न कि सुई की नोक बराबर ढाल मिलने पर पानी उधर ही बह निकलता है, लादेन मेरी तरफ ढाल पर लपके चले आ रहे थे। बोले- ‘ईद की कुछ खुश्क सिवईयां बची थीं, आज पकवालीं। एक डिब्बा तुम्हारे लिए ले आया हूं कि एक बार और चोंच मीठी कर लो। हम मामूली लोगों के लिए ये तीज त्योहार ही कामनवेल्थ गेम्स हैं जिनमें न कोई घपला है, न हेराफेरी। अपनी-अपनी औकात के हिसाब से टोपी पहन ली। निपट गई ईद।’

मुंह में दबा पान कुतर कर बोले- ‘खबरें ये हैंगी कि अब राज्य कर्मियों को भी कार खरीदने के लिए लोन मिलेगा। अभी तक सिर्फ अफसरों को मिलता था। अब क्लर्क भी अपनी सैंट्रो पर बैठ कर लंच के तईं बासी परांठे बांधे, आफिस आया करेगा। जब लोन की किस्त भरनी पड़ेगी तो कार के साथ-साथ अपनी हवा भी निकल जाएगी। खैर। आपको जान कर जरूरत से ज्यादा खुशी होगी कि बंदा भी लोन लेकर नई स्कूटर खरीदने जा रहा है। भले ही नकद पैसे जेब में हेल्मेट खरीदने के भी न हों।’

मुंह में सुपारी का बुरादा छिड़क कर लादेन जारी रहे- ‘मैं चूंकि रिटायर्ड राज्यकर्मी हूं सो न सही कार, स्कूटर का लोन तो दे ही देंगे। नहीं मिला लोन तो तकरीबन वैसी ही हड़कंप मचा दूंगा जैसी सांसदों ने अपनी पगार बढ़ाने के लिए मचाई। बेचारे गरीब, महंगाई के मारे सांसद। एक हजरत को पिस्तौल का लाइसेंस लेना था। उन्होंने तोप का लाइसेंस अप्लाई कर दिया। बोले कि सरकारी फाइलों में घटते-घटते तोप से पिस्तौल तक आ ही जाएंगे। मैं सरकार से ट्रक का लोन मांगूंगा, स्कूटर का मिल ही जाएगा। भले पेंशन से कटौती के बाद पेट्रोल डलवाने के पैसे न रहें। मेहंदी पीसते रहने से पत्थर लाल नहीं होता। लोन लो, घी पीयो।’  

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