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निराश करता थीम सॉन्ग

कॉमनवेल्थ गेम्स के थीम सॉन्ग के लिए एआर रहमान को चुना गया है। पिछले दिनों देशवासियों को उनकी प्रस्तुति ‘आओ यारों इंडिया’ सुनने को मिली। लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत इस थीम सॉन्ग पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं, उससे यही अहसास हुआ है कि इस गाने में न तो जोश है और न ही देश की संस्कृति की झलक। किसी भी थीम सॉन्ग से अपेक्षा यह होती है कि वह उस आयोजन के साथ-साथ आयोजनकर्ता देश की संस्कृति की खूबियों से मेहमानों को अवगत कराए, ताकि लोग उस देश में फिर से आने का मन बनाएं, लेकिन अन्य लोगों के अलावा मंत्री समूह को भी यह गीत पसंद नहीं आया। इसलिए कॉमनवेल्थ खेलों का गीत-संगीत ऐसा हो, जो हमारी नसों में सरस्वती वीणा की तरह ऊर्जा और उत्साह प्रवाहित कर दे और पूरे राष्ट्र को एकसूत्र में बंधने को प्रेरित कर दे। अब भी समय है, इस बड़े अवसर पर ऐसा गीत तैयार किया जाए, जो श्रोताओं पर अपनी अमिट छाप छोड़ सके।  
गुरुचरण लाल भाटिया,  7/30, रूप नगर, दिल्ली

निशाने पर बुजुर्ग
दिल्ली में आपराधिक घटनाएं जिस तेजी से बढ़ रही हैं, वे काफी परेशान करने वाली हैं। न सिर्फ संख्या के कारण, बल्कि अपराध के तरीकों को लेकर भी। आए दिन अखबारों में पढ़ने को मिलता है कि किसी बुजुर्ग दंपति की हत्या कर दी गई। उनके घर में दूसरा कोई नहीं था, उनके बच्चों विदेश में रहते हैं। अपराध की इन घटनाओं ने बुजुर्गो में इतना भय भर दिया है कि अब वे अपने आशियाने के बजाय ओल्ड-एज होम्स को कहीं अधिक सुरक्षित मानने लगे हैं। जिन दरो-दीवार में बसी यादों के साथ वे अपनी आखिरी सांसें लेना चाहते हैं, दिल्ली में अब उन्हें वह भी मुमकिन नहीं लगता। पुलिस उनकी सुरक्षा में अब विफल ही दिखती है।
मोहम्मद असफहानी खान, जामिया मिल्लिया इस्लामिया

वेतन विसंगति की मार
आजादी के बाद से आज तक, जब कभी भी सरकारी कर्मचारियों के वेतन-सुधार के लिए वेतन आयोग बना और उसकी सिफारिशें सामने आईं, उनमें हमेशा चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के साथ धोखा ही नजर आया। हर बार उच्च पदाधिकारियों को सर्वाधिक लाभ मिला। यही कारण है कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन में भी उनकी चांदी रही, जबकि उम्र भर अपनी तनख्वाह से मुश्किल से गुजारा करने वाले चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को बुढ़ापे में भी अपर्याप्त पेंशन की मार झेलनी पड़ती है। इसलिए केंद्र सरकार को एक जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन सीमा पंद्रह हजार करना चाहिए, ताकि वृद्धावस्था में वे किसी की दया के पात्र न रहें और सरकारी कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर हो सके।
रोशन लाल बाली, 655/5, महरौली, नई दिल्ली-30

डोपिंग का डंक
राष्ट्रमंडल खेलों के शुरू होने से पहले ही डोपिंग टेस्ट में विफल होने के कारण कई भारतीय खिलाड़ी खेलों से अलग कर दिए गए हैं, देशवासियों के लिए यह दुख की बात है। ऐसा लगता है कि भारतीय खिलाड़ियों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है। भारतीय ओलंपिक संघ को अपने खिलाड़ियों को तत्काल एक मानक उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि उन्हें पता चल सके कि कितने दिन पहले किन-किन चीजों से दूर रहना है। खाने-पीने की चीजों का भी नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि कई खाद्य तेलों में भी प्रतिबंधित तत्व पाए जाते हैं। आशा है कि खेल संघ और खिलाड़ी इस पर गंभीरता से ध्यान देंगे, ताकि भविष्य में देश को शर्मिदगी न उठानी पड़े।
शशांक शेखर, प्रकाश मोहल्ला, ईस्ट ऑफ कैलाश, नई दिल्ली

अमर्यादित टिप्पणी
पिछले दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आचरण के मुताबिक एक और विषाक्त टिप्पणी की। राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद भी पोंछा लगाएं, तब भी कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन का भला नहीं हो सकता। मोदी अपने विरोधियों पर हमला बोलते वक्त किस निचले स्तर पर उतर आते हैं, यह अलग से बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन क्या वह ये भी भूल जाते हैं कि उनकी इन हरकतों से गुजरात और गुजरातियों के सिर भी शर्म से झुकते हैं?
मदन सिंह, मंगल बाजार, लक्ष्मी नगर, दिल्ली

अन्न की हालत
अन्न का अपमान
नहीं गोदाम
भूखे इंसान
कैसे हुक्मरान
कोर्ट के फरमान
नहीं रहा मान
सभी परेशान
हे भगवान!
कीजिए समाधान
वेद, 1948-ई, नरेला, दिल्ली-40

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