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सीमा पर गोलीबारी

भारत सरकार के आश्वासन और बीएसएफ की गोलीबारी पर विराम लगाने के ऐलान के बावजूद बीएसएफ के हाथों बांग्लादेशी नागरिकों की हत्याएं जारी हैं। ऐसा लगता है कि पकड़े गए बांग्लादेशियों से निपटने का कोई नया तरीका निकाल लिया गया है। हाल की एक घटना में  सीमा पार करते हुए एक बांग्लादेशी मवेशी व्यापारी को बीएसएफ वालों ने पकड़ लिया। उसकी जबरदस्त पिटाई की गई। तैनात कमांडर ने इसकी पुष्टि भी की। बताया जाता है कि बाद में उस व्यापारी के पैर की बंधनी पेशियां काटकर उसे पद्मा नदी में फेंक दिया गया। यह बीएसएफ के एक शिविर के सदस्यों द्वारा एक हफ्ते में जान लेने की दूसरी घटना है। इसलिए हैरानी होती है कि क्या बीएसएफ ने सीमा का उल्लंघन करने वालों से निपटने की अपनी कार्यप्रणाली सचमुच बदल दी है।        
द डेली स्टार , बांग्लादेश

दिवालिएपन की ओर
वित्तमंत्री हफीज शेख ने पिछले हफ्ते की एक गंभीर मीटिंग में अधिकारियों को जो चेतावनी दी है उससे ज्यादा स्पष्ट कुछ भी नहीं हो सकता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार चाहे संघीय हो या प्रांतीय दोनों वित्तीय पतन के कगार पर हैं। राज्य की स्थिति इतनी खराब है कि कुछ महीनों बाद सरकार के पास वेतन देने के लिए धन नहीं बचेगा। इसे अतिशयोक्ति मानकर खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि शेख जैसी ही टिप्पणी, हाल के हफ्तों में ऐसे कई अर्थशास्त्री और विशेषज्ञों ने निजी स्तर पर की है, जो राज्य की वित्तीय स्थितियों से वाकिफ हैं। दरअसल वित्तमंत्री की टिप्पणी खतरे को आशावादी तरीके से देखने वाली है। बुनियादी समस्या स्पष्ट है कि पाकिस्तान अपने सभी स्तरों पर जितने राजस्व की कमाई करता है उसका दोगुना खर्च करता है। इस बीच न तो खर्च कम किया जा रहा है न ही राजस्व में बढ़ोतरी हो रही है।                          
द डान, पाकिस्तान

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