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कुंबले के जोड़ीदार के लिए तगड़ा मुकाबला

कुंबले के जोड़ीदार के लिए तगड़ा मुकाबला

स्पिनरों का स्वर्ग कही जाने वाली भारतीय धरती पर यदि सर्वकालीन भारतीय एकादश में यदि दो स्पिनरों को चुनना हो तो इससे ज्यादा मुश्किल काम कोई और हो नहीं सकता।
 
खेल वेबसाइट क्रिकइन्फो का सर्वकालीन भारतीय एकादश चुनने का काम आखिरी चरण में पहुंच चुका है और अब इस एकादश के लिए सिर्फ दो स्पिनरों को चुनना बाकी रह गया है। भारत अपने गौरवशाली टेस्ट इतिहास में ऐसे स्पिनरों की खान रहा है जो दुनिया की किसी भी बेहतरीन टीम में जगह बना सकते हैं।
 
बात चाहे सुभाष गुप्ते और वीनू मांकड की जोड़ी की हो, या फिर इरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर, बिशन सिंह बेदी और एस वेंकटराघवन की चौकड़ी की। या फिर अनिल कुंबले और हरभजन सिंह की खतरनाक जोड़ी की। इनमें से दो स्पिनरों को चुनना निश्चित रूप से क्रिकेट के मैदान में इन गेंदबाजों की गेंदों का सामना करने से भी कहीं ज्यादा मुश्किल काम है।
 
क्रिकइन्फो ने सर्वकालीन एकादश में स्पिन जोड़ी के लिए जो नौ उम्मीदवार चुने हैं उनमें कुंबले, बेदी, प्रसन्ना, गुप्ते, चंद्रशेखर, वेंकटराघवन, वीनू मांकड, दिलीप दोषी और हरभजन सिंह शामिल हैं। इन सभी स्पिनरों में लेग स्पिनर अनिल कुंबले का नाम एक स्पिनर की पोज़िशन के लिए सुरक्षित माना जा सकता है। कुंबले भारत के सबसे बड़े मैच विजेता खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान भारत की 43 जीतों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका यह आंकड़ा उन्हें स्पिन चौकड़ी की कुल मिलाकर दिलाई गई जीतों से कहीं आगे रखता है।

कुंबले ने इन 43 जीतों में 288 विकेट हासिल किए जिससे उनका सर्वकालीन भारतीय एकादश में दावा सबसे ज्यादा मज़बूत बन जाता है। एक पारी में सभी दस विकेट लेने वाले टेस्ट इतिहास के दूसरे बल्लेबाज और 619 विकेटों के साथ सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में तीसरे स्थान पर मौजूद कुंबले दुनिया के बेहतरीन स्पिनरों में से एक माने जाते हैं।
 
लेग स्पिनर कुंबले की मौजूदगी के कारण सुभाष गुप्ते और चंद्रशेखर के लिए टीम में जगह मुश्किल बनती दिखाई देती है। हालांकि यह दोनों ही स्पिनर हर लिहाज़ से महान कहे जाते हैं। गुप्ते के लिए तो वेस्टइंडीज़ के महान खिलाड़ी गैरी सोबर्स ने एक बार कहा था कि वह शेन वार्न से भी कहीं बेहतर गेंदबाज़ हैं।
 
दूसरी तरफ चंद्रशेखर ने इंग्लैंड में भारत की पहली जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। चंद्रशेखर की करिश्माई गेंदबाजी के कारण ही भारत को 1971 में टेस्ट सीरीज़ जीत सका था। जिस तरह कुंबले लगभग मध्यम गति के साथ लेग स्पिन फेंकते थे, उसी तरह चंद्रशेखर भी मध्यम गति के साथ लेग स्पिन फेंका करते थे।
 
इन नौ उम्मीदवारों में कुंबले के जोड़ीदार के लिए तीन लेफ्ट आर्म स्पिन गेंदबाजों बेदी, मांकड और दोषी तथा तीन आफ स्पिनरों प्रसन्ना, वेंकटराघवन और हरभजन सिंह के बीच मुकाबला बनता है। लेफ्ट आर्म स्पिन गेंदबाजी को कलात्मक स्वरूप देने वाले बेदी के लिए एक बार जिम लेकर ने कहा था कि उनके लिए यह स्वर्गिक अनुभव होगा यदि वह एक छोर से लेंडवाल और दूसरे छोर से बेदी को गेंदबाजी करते देखें।

67 टेस्टों में 266 विकेट लेने वाले बेदी अपने समय के सबसे बेहतरीन लेफ्ट आर्म स्पिनर गेंदबाज़ माने जाते हैं। मांकड एक ऑलराउंड खिलाड़ी की हैसियत से टीम में तो जगह बना सकते हैं लेकिन विशुद्ध स्पिनर की बात की जाए तो बेदी का पलड़ा उन पर भारी पड़ता है। बेदी के करियर के कारण ही दोषी 30 वर्ष की उम्र के बाद अपना टेस्ट करियर शुरु कर पाए थे।
 
तीन ऑफ स्पिनरों को देखा जाए तो विकेटों के लिहाज़ से बेशक हरभजन आगे हैं लेकिन गेंद को फ्लाइट कर बल्लेबाज़ को थकाने और उसे सम्मोहित करने में प्रसन्ना का कोई जवाब नहीं था। प्रसन्ना ने अपने पहले 100 विकेट तो सिर्फ 20 टेस्टों में ही पूरे कर लिए थे। वेंकटराघवन को प्रसन्ना के कारण ही भारतीय टीम से अंदर-बाहर होते रहना पड़ा था। हालांकि वह भी एक बेहतर ऑफ स्पिनर माने जाते थे।
 
हरभजन टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय बने और उनकी कुंबले के साथ जोड़ी काफी खतरनाक मानी जाती थी। पिछले एक दशक में कुंबले के संन्यास लेने तक इन दोनों ने एकसाथ खेलते हुए 54 टेस्टों में 501 विकेट लिए थे और भारत को चोटी की टेस्ट टीम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
 
लेकिन कलात्मकता और स्पिन की जादूगरी के लिहाज से प्रसन्ना का पलड़ा वेंकटराघवन और हरभजन दोनों पर भारी पड़ता है। इस लिहाज़ से देखा जाए तो कुंबले के जोड़ीदार के रूप में मुख्य मुकाबला बेदी और प्रसन्ना के बीच है।

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