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उफान पर मोबाइल फोन बाजार, बेसिक में मंदी

आर्थिक मंदी की वजह से दुनिया भर मंे उद्योगों का बुरा हाल है और बड़ी अर्थव्यवस्थाआें में बैंकिंग और अन्य उद्योग धराशाई हो रहे हैं, लेकिन ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत का मोबाइल फोन बाजार उफान पर है और नित नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। देश में मोबाइल बाजार 60 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है। निवेशकों के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और इस क्षेत्र के राजस्व में तेजी से इजाफा हो रहा है। देश में जनसंख्या के आधार पर टेलीफोन घनत्व भी लगातार बढ़ रहा है। दिसंबर 2008 में यह 33.23 प्रतिशत था। इससे एक माह पूर्व नवंबर में टेलीफोन घनत्व की दर 32.34 प्रतिशत थी। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अनुसार दिसंबर तक देश में मोबाइल टेलीफोन उपभोक्ताआें की कुल संख्या 38 करोड़ 47 लाख 0 हजार थी, जिसके 2010 तक बढ़कर 53 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यदि यह अनुमान सही निकलता है तो अगले दो वषर्ों में भारत दुनिया में मोबाइल फोन क्षेत्र का सबसे तेज गति से बढने वाला बाजार बन जाएगा। दिसंबर 2008 में देश में एक करोड़ आठ लाख दस हजार से अधिक नए मोबाइल फोन धारक जुड़े और मोबाइल फोन उपभोक्ताआें की कुल संख्या 38 करोड़ 47 लाख 0 हजार पहुंची। दिसंबर 2007 में यह संख्या 22 करोड़ 54 लाख 60 हजार थी जो जनवरी 2008 में बढ़कर 23 करोड़ 36 लाख 30 हजार तक पहुंच गई। इसके अगले 11 माह में यानी नवंबर 2008 तक यह संख्या 33 करोड़ 60 लाख 80 हजार थी। आश्चर्य यह है कि देश में बेसिक फोन उपभोक्ताआें की संख्या में निरंतर गिरावट आ रही है। उपभोक्ता अपने कनेक्शन कटा रहे हैं और बदले में मोबाइल फोन सेवा को अपना रहे हैं। दिसंबर में बेसिक फोन से नाता तोडने वाले उपभोक्ताआें की संख्या एक लाख 50 हजार के आसपास थे जबकि इस दौरान मोबाइल फोन उपभोक्ताआें की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ। ट्राई ने नवंबर में टेलीफोन उपभोक्ताआें की जो संख्या दी है उसमें बेसिक फोन धारकों की संख्या 3.7रोड है। दिसंबर 2007 में बेसिक फोन धारकों की संख्या तीन करोड लाख 10 हजार थी जो जनवरी 2008 में घटकर तीन करोड 0 लाख 50 हजार रह गई। नवंबर 2008 में इस संख्या में फिर कटौती हुई और बेसिक फोन धारकों की संख्या तीन करोड 80 लाख 50 ही रह गई। देश में लगातार बढ रहे टेलीफोन घनत्व को देखते हुए सभी प्रमुख मोबाइस सेवा प्रदाता कंपनियां आकर्षक बने भारतीय बाजार में पैसा लुटाने में जुटी है। विश्लेषकांे का अनुमान है कि आने वाले वषर्ों में भी भारत का मोबाइल बाजार विश्व की सभी प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहेगा। अगले दो वषर्ों के दौरान भारत के दूरसंचार क्षेत्र में 20 अरब डालर से अधिक का निवेश किया जाएगा और देश की 80 प्रतिशत आबादी मोबाइल फोन कबरेज के दायरे में होगी। सेवा प्रदाता चालू वित्त वर्ष की समाप्ति तक 10 अरब डालर तथा अगले वित्त वर्ष तक फिर इतनी ही राशि का निवेश इस क्षेत्र में करने की योजना बना रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों का यह उत्साह हर माह भारतीय मोबाइल फोन उपभोक्ताआें की बढती संख्या के कारण बना हुआ है। देश मंे मोबाइल बाजार में हर माह 60 लाख नए ग्राहक जुड रहे हैं। देश के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल फोन का प्रसार तेजी से हो रहा है जिसकी वजह से सेवा प्रदाताआें का इस क्षेत्र में निवेश का आकर्षण भी बढ रहा है। अनुमान है कि देश में 2010 तक मोबाइल फोन सेवा प्रदाताआें की आय में भी जबर्दस्त इजाफा होगा और यह 33.1 अरब डालर से अधिक हो जाएगी। देश में 2006 में मोबाइल सेवा प्रदाताआें का सालाना राजस्व महज 12.8 अरब डालर था। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले चार वषर्ों यह राजस्व वर्तमान के 22.5 अरब डालर से बढ़कर 43.6 अरब डालर पहुंच जाएगा। इसी तरह मोबाइल कारोबार भी 57 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा। वर्ष 2010 तक देश के मोबाइल बाजार भारतीय एअरटेल के ग्राहकों का आधार 24.5 प्रतिशत, रिलायंस के ग्राहकों की हिस्सेदारी 20.7 प्रतिशत, वोडाफोन की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत तथा सार्वजनिक क्षेत्र के भारत संचार निगम (बीएसएनएल) के ग्राहकों का आधार 12.3 प्रतिशत से अधिक रहेगा। देश में 3जी स्पेक्ट्रम भी सफलता के झंडे गाड़ने के लिए तैयार है। सरकार निविदाआें के जरिए स्पेक्ट्रम आवंटन का काम 31 जनवरी तक पूरा कर सकती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं मांगी गई है और 3जी तथा 4जी स्पेक्ट्रम से सरकार 8.3 अरब डालर जुटा सकती है। वोडाफोन एस्सार ने वैश्विक मंदी को देखते हुए स्पेक्ट्रम आवंटन कुछ समय रोकने का सरकार से अनुरोध किया था लेकिन दूरसंचार मंत्रालय के सूत्रों को विश्वास है कि इस तरह की मांग का कोई असर नहीं होगा और स्पेक्ट्रम का आवंटन पूर्व निर्धारित समय पर कर दिया जाएगा। देश में 3जी स्पेक्ट्रम आवंटन के बाद मोबाइल क्षेत्र में जबरदस्त क्रांति आने की संभावना है।

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