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महंगाई के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल से जनजीवन अस्त-व्यस्त

महंगाई के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल से जनजीवन अस्त-व्यस्त

महंगाई और मजदूर वर्ग की समस्याओं के प्रति केन्द्र सरकार की अनदेखी के खिलाफ केन्द्रीय मजदूर संगठनों के नेतृत्व में मंगलवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल से देश के कई हिस्सों में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया।

आवश्यक वस्तुओं की तेजी से बढ़ती कीमतों तथा श्रम कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ आयोजित इस हड़ताल में एटक, सीटू, पीयूसीसी और इंटक सहित नौ मजदूर संगठन शामिल हैं। इनके अलावा बैंक कर्मचारी भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। देश के कई हिस्सों में सड़क और हवाई यातायात भी बाधित हो गया है।

मजदूर संगठनों का आरोप है कि कीमतों तथा श्रम कानूनों का खुल्लमखुला उल्लंघन हो रहा है लेकिन सरकार उद्योगपतियों एवं पूंजीपतियों के हितों की रक्षा करने की मंशा से हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हड़ताल का सबसे अधिक असर पश्चिम बंगाल और केरल राज्यों में पडा़ है।

ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल का वामदल प्रशासित राज्यों केरल और पश्चिम बंगाल में व्यापक असर देखने को मिला है। एक दिन के हड़ताल का अह्वान महंगाई, श्रम कानूनों के उल्लंघन और सरकारी उपक्रमों के शेयरों के बिक्री की नीति के विरुद्ध में किया गया है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सप्रंग) सरकार की आर्थिक नीतियों और दामों में वृद्धि को लेकर भाजपा और वामदलों के देशव्यापी हड़ताल के दो माह बाद आयोजित हड़ताल का देश के दूसरे भागों में असर नहीं दिखा है।

एटक, सीटू, एचएमएस एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एआईसीसीटीयू, यूटीयूसी और कांग्रेस से जुड़े आईएनटीयूसी के बैनर तले किये गए हड़ताल में कोयला, बिजली, दूरसंचार, बैंक, बीमा, रक्षा, पतन, सड़क परिवहन, पेट्रोलियम और निर्माण से जुड़े क्षेत्रों के कामगार संगठन शामिल हैं।

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