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शिक्षा के बाजारीकरण पर नहीं बोले वक्ता

 समाजवादी छात्रसभा की इस संगोष्ठी में यूँ तो शिक्षा के बाजारीकरण पर भी चर्चा होनी थी पर सांसद धर्मेद्र यादव को छोड़ किसी भी वक्ता ने इस बारे में कुछ भी नहीं कहा। सभी वक्ता छात्रसंघ तक ही सीमित रहे। किसी ने छात्रसंघ का गौरवमयी इतिहास बताया तो किसी ने इसके महत्व के बारे में चर्चा की। एक वक्ता अपने और कुलपति के बीच हुए विवाद को भी बताना नहीं भूले। पूर्व अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे ने इस आंदोलन से छात्रओं को जोड़ने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के लिए जो आग होनी चाहिए वह नहीं दिखती इसलिए पहले छात्रों को इसके लिए एकजुट होना पड़ेगा। श्री दुबे ने छात्रों से इंकलाब जिंदाबाद के नारे भी लगवाए।

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