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फिर से गुलजार होंगे सचिवालय

बस 24 घंटे बाकी है। सचिवालयों से फिर मंत्रियों का शासन चलेगा। सचिवालय के गलियार गुलजार होंगे। पैरवीकारों की भीड़ जुटेगी। वहां महीने भर से कायम आप्त सचिवों की हुकूमत समाप्त होगी। सचिवों के चैम्बरों में अधिकारियों की मीटिंगों का दौर चलेगा। लोकसभा चुनाव ने बिहार सरकार के पांचों प्रमुख सचिवालयों की गहमागहमी करीब-करीब समाप्त कर दी थी। गुरुवार को पटना में मतदान के कारण सचिवालय बन्द रहेंगे। यह देखते हुए बुधवार को दिन भर मंत्रियों के चैम्बरों को साफ-सफाई का काम हुआ। शुक्रवार से मुख्य सचिवालय, नया सचिवालय (विकास भवन), विश्वेश्वरैया भवन, टेक्नोलॉजी भवन और सिंचाई भवन के चैम्बरों में मंत्रियों के फिर से बैठने की संभावना है। पिछले एक महीने से महत्वपूर्ण सरकारी फाइलों को मंत्रियों के आप्त सचिव मंत्रियों की सुविधानुसार उनके समक्ष पेश कर किसी तरह उसका निष्पादन कराते रहे हैं।ड्ढr ड्ढr चूंकि अन्य राज्यों में अभी 13 मई को भी चुनाव है इसलिए दूसर राज्यों में चुनाव कराने गये सूबे के कई अधिकारियों को वापस लौटने में अभी देरी है। पर कुछ मंत्रियों ने अपने आप्त सचिवों को ताकिद कर दिया है कि वे विभागीय कार्यो की पूरी फेहरिस्त शुक्रवार को उनके समक्ष उपस्थित करं। हालांकि दूर दराज क्षेत्रों में चुनाव प्रचार कर रहे और चुनाव लड़ रह रहे मंत्रियों के सोमवार से ही सचिवालय में आने की संभावना है।ड्ढr ड्ढr पथ निर्माण मंत्री डा. प्रम कुमार, स्वास्थ्य मंत्री नन्दकिशोर यादव, नगर विकास मंत्री डा. भोला सिंह, सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डा. अनिल कुमार समेत कई मंत्रियों ने अपने आप्त सचिवों को निर्देश दिया है वे फाइलों का निबटारा अब सचिवालय में ही करंगे। बिहार सरकार के चार मंत्री डा. भोला सिंह, दिनेश चन्द्र यादव, दामोदर रावत और वृशिण पटेल खुद चुनाव लड़ रहे हैं जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी समेत अन्य सभी मंत्री एनडीए उम्मीदवारतों की जीत सुनिश्चित कराने के लिए महीने भर से जिलों की दौड़ लगाते रहे हैं। बिहार में चौथे और अंतिम चरण के चुनाव के लिए 5 मई को प्रचार कार्य समाप्त हुआ है और तब मंत्रियों की जान में जान आयी है।ं

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