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यह सीख है

यह सीख है कि बेशक पुलिस अफसर बनना, नाम कमाना, पर हरियाणा और गुजरात का पुलिस अफसर कभी मत बनना क्योंकि आखिर में उन्हें जेल ही मिलती है। पुलिस अफसरों का काम होता है, अपराधियों को जेल पहुंचाना। पर इन दोनों राज्यों के पुलिस अफसर खुद ही जेल पहुंच जाते हैं। रास्ता भटककर नहीं पहुंचते हैं। रास्ता तो वे पदोन्नति का ही चुनते हैं। पर पहुंच जाते हैं जेल।

ऐसा नहीं है कि हरियाणा के अफसर कोई घोटाला करके जेल जाते हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि वे घोटाला न करने की शपथ ही लेकर आते हैं। वे तो सेक्स स्कैंडल में ही जेल जाते हैं। पर इतनी आसानी से भी नहीं जाते। पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को पहले या तो आत्महत्या करनी पड़ती है या आत्मदाह। इसके बाद ही जब राठौर जैसे पुलिस अफसर जेल जाते हैं, तो हंसते-मुस्कुराते हुए जाते हैं।

गुजरात के पुलिस अफसर एनकाउंटर करके जेल जाते हैं। गुजरात कोई उग्रवाद, आतंकवाद या माओवाद पीड़ित राज्य नहीं है। फिर भी गुजरात के पुलिस अफसरों ने एनकाउंटर करने में महारत हासिल कर ली है। वहां इसकी कोई बहुत पुरानी परंपरा भी नहीं है। पर अब वहां के पुलिस अफसर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बन रहे हैं। ऐसे स्पेशलिस्टों को तमगे मिलते हैं। पर गुजरात के अफसरों को तो जेल ही मिल रही है।

सीख यह भी है कि हिंदुस्तान में कोच कभी मत बनना। वैसे तो अपनी टीमों की हार के बाद मैराडोना और डूंगा जैसे लोग भी कोच बनकर पछता रहे हैं, पर अपने यहां कोच ऐसे नहीं पछताते, क्योंकि जीत तो हमें कभी मिलती नहीं और हमेशा हारकर कितना पछताया जा सकता है। यहां तो सेक्स स्कैंडल में फंसकर उन्हें बेआबरू होकर निकलना पड़ता है, चाहे वह महिला हॉकी टीम का कोच हो या वेटलिफ्टिंग का। 
  

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