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सर न्यूटन बनाम स्टीफन हॉकिंग

आपका संपादकीय ‘हॉकिंग के ईश्वर’ पढ़कर एक किस्सा याद आ गया। एक बार प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन का नास्तिक मित्र उनकी प्रयोगशाला में आया। जिस समय वह प्रयोगशाला में दाखिल हुआ, उस समय सर न्यूटन काम में व्यस्त थे। तभी उस मित्र की निगाह सौरमंडल के उस सुंदर मॉडल पर पड़ी, जिस पर लगे हैंडल को घुमाने से उस मॉडल में मौजूद सभी ग्रह-उपग्रह अपनी-अपनी कक्षाओं में घूमने लगते थे। वह मॉडल न्यूटन ने स्वयं बनाया था। मॉडल को घुमाते हुए मित्र ने न्यूटन से पूछा, ‘यह मॉडल किसने बनाया है?’ न्यूटन ने कहा, ‘किसी ने नहीं।’ मित्र ने चिढ़ते हुए पूछा, ‘ऐसा कैसे हो सकता है? आखिर इसे किसी न किसी ने तो बनाया ही होगा?’ न्यूटन ने मुस्कराते हुए कहा कि जब तुम्हारी राय में वास्तविक सौरमंडल को बनाने वाला कोई नहीं है, तो उसकी तुलना में यह मॉडल कुछ भी नहीं है।’ न्यूटन के कहने का आशय समझ गया और आस्तिक बन गया।
सुभाष लखेड़ा, सी-180, सिद्धार्थ कुंज, सेक्टर-सात, द्वारका, दिल्ली-75

सुषमा स्वराज की आपत्ति
मीडिया में ऐसी खबरें आई हैं कि केंद्र सरकार नए मुख्य सतर्कता आयुक्त के रूप में पीजे थॉमस के नाम पर मुहर लगाने जा रही है, जबकि चयन समिति में सदस्य के नाते प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने थॉमस के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई थी। गौरतलब है कि इस तीन सदस्यीय चयन समिति में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विपक्ष के नेता सदस्य होते हैं। यदि विपक्ष की नेता की आपत्तियों को दरकिनार ही करना है, तो फिर यह पूरी कवायद ही बेमानी हो जाती है। मेरी राय में चुनाव आयुक्त, मुख्य सूचना आयुक्त और मुख्य सतर्कता आयुक्त, सीबीआई प्रमुख जैसे पदों के लिए सर्वसम्मत चुनाव होना चाहिए। इससे विपक्ष को भेदभाव का आरोप लगाने का मौका भी नहीं मिलेगा।
सुभाष चंद्र अग्रवाल, चांदनी चौक, दिल्ली

नासूर बनते नक्सली
पहले दंतेवाड़ा में 76 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या, फिर मिदनापुर में यात्री ट्रेन पर हमला और अब बिहार में चार पुलिसकर्मियों के अपहरण के बाद एक पुलिस वाले की हत्या की घटनाओं से देशवासी स्तब्ध हैं और प्रशासन अपनी कमियों पर लीपापोती करने में जुटा है। एक-दूसरे पर दोषारोपण का खेल बदस्तूर जारी है। उड़ीसा, बिहार, छत्तीसगढ़, प़श्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कोयला, खनिज, लोहा, इस्पात आदि प्राकृतिक संसाधन भरपूर मात्र में उपलब्ध हैं, लेकिन नक्सली समस्या के विकराल होते जाने के कारण इन राज्यों में रोजगार के साथ-साथ विकास कार्य भी प्रभावित हो रहा है। सरकारी उदासीनता और भ्रष्टाचार इसकी मुख्य वजह हैं। नासूर बनती नक्सली समस्या लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए काफी खतरनाक बनने लगी है! अत: शीघ्र ही सरकार को नक्सलियों की नाक में नकेल कसनी होगी तथा उनके आर्थिक स्रोतों को बंद करना होगा, वर्ना बाद में हमें पछताने का भी वक्त नहीं मिलेगा।
अशोक कुमार शर्मा, शालीमार गार्डन, साहिबाबाद

मदर टेरेसा से सीखिए
भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मदर टेरेसा का जन्मदिन 26 अगस्त को पूरी दुनिया में मनाया गया। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव सेवा को समर्पित कर दिया था। आज हमारे नेता गरीबों और असहायों के कल्याण का दम भरते हैं और चुनावों में लाखों-करोड़ों की राशि पानी की तरह बहा देते हैं। यदि वे नि:स्वार्थ भाव से इस पैसे को गरीबों के कल्याण हेतु खर्च करें, तो न जाने कितनी सूखी हड्डियों पर मांस चढ़ आए। क्या राजनीति में जाकर ही जन सेवा की जा सकती है? शायद नहीं, मदर टेरेसा ने अपने आचरण से हमें यह दिखा दिया है। हम सभी को मदर टेरेसा से सीख लेनी चाहिए और बिना किसी अपेक्षा के पीड़ितों की सेवा करनी चाहिए।
सुनील कुमार प्रेमी, सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा

सरकार की कारस्तानी
दिल्ली सरकार को एक बात के लिए धन्यवाद दिया जाना चाहिए। उसने हमें एक ऐसा मौका दिया है, जिससे हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को बता-दिखा सकेंगे कि देखो, हमारे जमाने में कनॉट प्लेस कैसा दिखता था। उसकी सड़कें पार करने के लिए किस तरह लोगों को दो फुटपाथों के बीच दौड़ लगानी पड़ती थी या फिर छलांग लगानी पड़ती थी। शुक्रिया शीला जी, आपने कनॉट प्लेस के तमाम सब-वे बंद कराके बहुत अच्छा किया! 
भरत त्रिवेदी

सांसदों की एकता
कौन कहता है कि हमारे देश में एकता नहीं है? अगर एकता देखनी है, तो हमारे सांसदों की देखिए। अपने वेतन में बढ़ोतरी के लिए इन जन प्रतिनिधियों ने संसद में एकता का जो प्रदर्शन किया, वह अद्भुत था। काश! इन्होंने जन सरोकार के मामलों में ऐसी ही एकजुटता का परिचय दिया होता, तो आज देश में गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा व अपराध का बोलबाला नहीं होता।
धर्मेन्द्र कुमार, नंगली डेरी, नजफगढ़, नई दिल्ली

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