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हमने ऐसा क्यों किया

अखबारों को हर रोज अपने पाठकों को यह बताने की जरूरत नहीं होती कि उन्होंने जो किया वह क्यों किया। आप में से तमाम लोगों ने आश्चर्य जताया और कुछ ने प्रतिरोध भी किया कि काठमांडू पोस्ट ने उस खबर को जगह नहीं दी, जो दूसरे अखबारों में प्रमुखता से थी। इस पर सफाई देने की जरूरत है। जिस खबर पर सवाल उठ रहे हैं, वह इस आरोप पर आधारित है कि चीन ने माओवादी पार्टी को भारी धन देने का प्रस्ताव रखा था, ताकि प्रधानमंत्री के चुनाव के नतीजों पर वह अपना असर डाल सके। शुक्रवार की रात और अगली सुबह खबर थी कि चीन ने माओवादी नेतृत्व को 50 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव दिया था। माओवादी नेता कृष्ण बहादुर महारा और एक चीनी अधिकारी के बीच हुई बातचीत के जिस टेप पर जो स्टोरी आधारित थी, उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी थी।    
काठमांडू पोस्ट

बड़ी तस्वीर की उपेक्षा
सांसद आज वेस्टमिनिस्टर लौट रहे हैं और वे सीधे उस संग्राम की ओर बढ़ रहे हैं, जो संसद की अहम लड़ाई साबित हो सकती है। हाउस आफ कॉमन्स की सबसे बड़ी बहस का मुद्दा अगले साल मई में वैकल्पिक मतदान प्रणाली पर जनमत संग्रह के लिए गठबंधन सरकार का विधेयक बन सकता है। हालांकि पिछले चुनाव में लेबर पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में वैकल्पिक विधेयक को समर्थन देने का वादा किया था लेकिन वह इसके खिलाफ मतदान का मन बना चुकी है। उनका आरोप है कि सरकार इस विधेयक के मार्फत कंजरवेटिव पार्टी के लिए वोट भी तैयार कर रही है। लेबर नेतृत्व के चहेते डेविड मिलीबैंड ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया है कि गठबंधन सरकार इस विधेयक के माध्यम से सांसदों की संख्या 650 से घटाकर 600 करते हुए छात्र राजनीति कर रही है।
द इंडिपेंडेंट, लंदन

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