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भारतीय फुटबॉल का सुनहरा भविष्य : भूटिया

भारतीय फुटबॉल का सुनहरा भविष्य : भूटिया

भारतीय फुटबॉल कप्तान बाइचुंग भूटिया ने कहा है कि टीम में अनके युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण इस खेल में भारत का भविष्य काफी अच्छा है।
 
भूटिया ने सोमवार को नाइकी द्वारा टीम की नई जर्सी लांच किए जाने के अवसर पर कहा कि हम जिस सधे अंदाज़ से आगे बढ़ रहे हैं उससे मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय फुटबॉल का भविष्य सुनहरा है। पांच वर्ष पहले के मुकाबले इस समय भारतीय फुटबॉल के काफी बदलाव आ चुका है।
 
भारतीय कप्तान के साथ इस अवसर पर दूसरे स्टार स्ट्राइकर सुनील छेत्री, मेहराजुद्दीन वादू, महेश गवली और एन पी प्रदीप भी मौजूद थे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के महासचिव अल्बटरे कोलासो भी इस मौके पर उपस्थित थे।
 
भारत को बुधवार को थाईलैंड के खिलाफ यहां डा. अंबेडकर स्टेडियम में रिटर्न मैत्री अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना है। बैंकॉक में शनिवार को इसी टीम के खिलाफ खेले गए मैच में भारतीय टीम को 0-1 से पराजय का सामना करना पड़ा था।
 
भारतीय टीम की नई घरेलू जर्सी पहने खड़े भूटिया ने कहा कि टीम के 60 से 70 प्रतिशत खिलाड़ी युवा हैं और उनकी औसत आयु 24 वर्ष से कम है। उन्होंने सुनील छेत्री और मोहम्मद रफी जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि टीम के युवा खिलाड़ियों में ज़बर्दस्त संभावनाएं हैं और वे भारतीय फुटबॉल को काफी आगे तक ले जा सकते हैं।

भूटिया ने कहा कि भारतीय टीम में अपार संभावनाएं हैं। हमारे पास कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जो लंबे समय तक खेलने और टीम को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
 
कप्तान ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में काफी बदलाव आया है। पहले तो यह होता था कि हर टूर्नामेंट से पहले लगभग नई टीम होती थी और खिलाड़ियों को अभ्यास का पूरा मौका नहीं मिलता था। लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। खिलाड़ियों में निरंतरता है और उन्हें घरेलू तथा विदेशी ज़मीन पर लगातार अभ्यास के मौके मिल रहे हैं।
 
भूटिया ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हमने काफी प्रगति की है और हम अब एशिया की शीर्ष टीमों में शुमार किए जाने वाले थाईलैंड और सीरिया के स्तर तक पहुंच गए हैं। थाईलैंड के खिलाफ हमारा पिछला मैच इसी बात का उदाहरण है। एक समय था जब भारतीय खिलाड़ी आत्मविश्वास के स्तर पर दूसरी टीमों से पीछे रहते थे और मनोवैज्ञानिक लड़ाई में दूसरों से मात खा जाते थे।
 
उन्होंने कहा कि लेकिन अब हमारे खिलाड़ी मनोवैज्ञानिक रूप से काफी मज़बूत हो गए हैं और बड़ी टीमों के खिलाफ खेलने में भी कोई कमज़ोरी नहीं दिखाते। भूटिया ने साथ ही आह्वान किया कि राष्ट्रीय टीम को मज़बूत करने के लिए देश का क्लब ढांचा भी सुदृढ किया जाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी मिल सकें।
 
उन्होंने कहा कि क्लब ढांचे में सुधार की ज़रूरत है और खिलाड़ियों को बहुत जल्दी नहीं बदला जाना चाहिए। आमतौर पर ऐसा होता है कि क्लबों में खिलाड़ी जब तक एक दूसरे को समझ पाते हैं तब तक सत्र खत्म हो जाता है और अगला सत्र शुरु होने तक कई खिलाड़ी बदल जाते हैं जिसके कारण क्लब ढांचा मज़बूत नहीं हो पाता।
 
इस अवसर पर मौजूद भूटिया के जोड़ीदार और टीम के स्टार स्ट्राइकर सुनील छेत्री ने कहा कि अगले वर्ष के शुरु में होने वाले एशिया कप के लिए टीम की तैयारी काफी अच्छी चल रही है। उन्होंने इन तैयारियों के लिए पुर्तगाल के हाल के लंबे दौरे को काफी उपयोगी बताया।
 
छेत्री ने कहा कि पुर्तगाल का दौरा काफी अच्छा था और खिलाड़ियों को वहां अच्छी सुविधाएं मिली थी। टीम ने वहां कई मैचों में अच्छा प्रदर्शन भी किया और हमारे लिए यह बेहद शानदार अनुभव रहा। हमें उम्मीद है कि टीम इस प्रदर्शन को भविष्य में आगे भी बरकरार रखेंगे।
 
स्ट्राइकर ने कहा कि एएफसी चैलेंज कप जीतने के बाद से भारतीय टीम की एक नई शुरुआत हुई है और इस शुरुआत को एशिया कप में अंजाम तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान पूरी तरह अपने खेल और किस तरह हम इसमें सुधार ला सकते हैं उस पर लगा हुआ है।

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  • Web Title:भारतीय फुटबॉल का सुनहरा भविष्य : भूटिया