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1 अप्रैल, 2020|12:43|IST

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नीति निर्धारण में हस्तक्षेप न करे न्यायालय: प्रधानमंत्री

नीति निर्धारण में हस्तक्षेप न करे न्यायालय: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से अत्यंत शालीनता से कहा कि वह नीति निर्धारण के क्षेत्र में हस्तक्षेप न करे। न्यायालय ने पिछले दिनों सरकार को आदेश दिया था कि वह खराब हो रहे अनाज का गरीबों के बीच नि:शुल्क वितरण करे।

मनमोहन ने अपने निवास पर संपादकों से कहा कि लगभग 37 फीसदी लोगों को, जो गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं, अनाज निशुल्क तौर पर कैसे बांटा जा सकता है। कहा कि सभी गरीबों को निशुल्क अनाज बांट पाना संभव नहीं है। उनसे सुप्रीम कोर्ट की ओर से कृषि मंत्री शरद पवार को दिए आदेश के बारे में पूछा गया था। न्यायालय ने आदेश दिया था कि सरकार अनाज को सड़ाने की बजाए उसका गरीबों के बीच वितरण कर दें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अदालत का अंतिम फैसला नहीं देखा है, लेकिन वह इस फैसले की भावना का सम्मान करते हैं कि जब अनाज सड़ रहा है, तो गरीबों की जरूरतें पूरा करने के लिए कोई रास्ता तलाशाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मैं भी इस बात को मानता हूं कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को उचित दामों में अनाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए। हमने गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों के लिए अनाज की कीमतों में वर्ष 2004 के बाद से इजाफा नहीं होने दिया है।

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