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पार्टी और सरकार के बीच मतभेद नहीं: मनमोहन

पार्टी और सरकार के बीच मतभेद नहीं: मनमोहन

अपनी सरकार और कांग्रेस पार्टी के बीच मतभेद की अटकलों से इंकार करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि अलग अलग राय जाहिर करना जरूरी नहीं कि झगड़े का संकेत हों।

प्रधानमंत्री को इस बात में कुछ गलत नहीं लगता कि मंत्रियों और उनकी पार्टी के पदाधिकारियों की राय अलग अलग हो, क्योंकि कांग्रेस पार्टी अपने आप में एक आंदोलन है, जिसमें मत भिन्नता रही है, जैसा लोकतंत्र में होता है।

मनमोहन सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली में अपने आवास पर संपादकों के एक समूह से कहा कि केबिनेट और सरकार के लिए कुछ हद तक सामंजस्य से काम करना जरूरी है और उन्होंने कहा कि उनकी केबिनेट ने जवाहरलाल नेहरू की पहली केबिनेट से भी बेहतर तालमेल से काम किया है।

उन्होंने याद दिलाया कि नेहरू और उनके सहायक सरदार पटेल के बीच हर रोज खतोकिताबत होती थी। इंदिरा गांधी और उनके सहायक मोरारजी देसाई के बीच भी मतभेद रहे। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के समय में चंद्रशेखर के नेतृत्व में कुछ युवा तुर्कों ने खुलेआम एक असंतुष्ट दल बनाया।

संपादकों के साथ प्रधानमंत्री की यह मुलाकात एक संवाददाता सम्मेलन में बदल गई, जिसमें उन्होंने घरेलू राजनीतिक मामलों, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर बात की।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उन्हें ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है, जिससे ऐसा लगे कि कांग्रेस पार्टी और उनकी सरकार के बीच दुराव है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी राय जाहिर करने की इजाजत देना, जरूरी तो नहीं कि झगड़े का संकेत हो।

उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह सकता कि मैं अपने हर सहयोगी की जुबान बंद कर दूंगा। प्रधानमंत्री ने भरपूर समर्थन के लिए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगी का आभार भी व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि वह रिटायर होने के बारे में नहीं सोच रहे हैं और संकेत दिया कि वह सात नवंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र से पहले केबिनेट में फेरबदल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल की औसत आयु कम करना चाहेंगे।

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