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अपलोड

कई बार आपको इंटरनेट से तमाम चीजें डाउनलोड करने की जरूरत पड़ती है। इंटरनेट से अपने सिस्टम में कोई फाइल या मैटर अपलोड करने में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हाई स्पीड डाटा को अपलोड करने में कम समय लगता है जबकि लो स्पीड डाटा को अपलोड करने में ज्यादा। जब आप किसी मैटर को अपलोड करते हैं तो इसके लिए एक रिक्वेस्ट आपके ब्राउजर से इंटरनेट को भेजी जाती है।

यह ठीक तब होता है, जब आप किसी मैटर को संग्रहित करने के लिए क्लिक करते हैं। इस केस में मैटर छोटा होता है और यह एक स्माल डाटा के पैकेट में रहता है। इसमें एक इंटरनेट प्रोटोकॉल और कुछ जरूरी जानकारियां शामिल होती हैं। डाटा पैकेट या आपकी रिक्वेस्ट या एक उल्टा-पुल्टा रास्ता तय करके इंटरनेट तक पहुंचती है, जहां से यह सर्वर को भेज दी जाती है। जिस रास्ते से इसे भेजा जाता है, उसी रास्ते से यह वापस आती है। इसे ही डाउनलोडिंग या अपलोड करना कहते हैं।

चूंकि वेबपेज में बहुत थोड़े ही डाटा को स्टोर किया जाता है, इसलिए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर में एक बैंडविड्थ सुरक्षित रहती है, जो डाउनलोड स्पीड से कहीं कम होती है, इसे अपस्ट्रीम स्पीड कहते हैं। उदाहरण के लिए, एक भारी वेबपेज को डाउनलोड करने के लिए इंटरनेट की डाउनलोड स्पीड 1500 किलोबिट्स प्रति सेकेंड होनी चाहिए, लेकिन चूंकि आमतौर पर यह 350 किलोबिट्स प्रति सेकेंड ही होती है, इसलिए इसे डाउनलोड करने में ज्यादा समय लगता है।

इसे हम ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर डाउनलोड और अपस्ट्रीम दो अलग-अलग सुरंगें हैं तो डाउनलोड का आकार अपस्ट्रीम से चार गुना ज्यादा होगा। ऐसे ही जब आप वेबसाइट बनाते हैं तो आपको कई वेबपेज लोड करने होते हैं। टेक्स्ट फाइल जल्दी लोड हो जाती है जबकि फोटो या वीडियो अपलोड करने में ज्यादा समय लगता है। ऐसा ही तब होता है जब हम सोशल नेटवर्किग साइट पर कुछ अपलोड करते हैं।

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