DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ये तो नहीं चलेगा

अपनी टीम को सुबह ही काम पर लगा दिया था। शाम होते-होते तक कई तरह के आइडिया पेश कर दिए गए थे। एक आइडिया बेहद हिचक के साथ आया था। उन्हें उसी में सबसे ज्यादा उम्मीद नजर आ रही थी।
 
टीना सीलिग का मानना है कि सबसे अच्छे और सबसे बुरे आइडिया पर एक साथ काम करना चाहिए। वह स्टैंफर्ड टेक्नोलॉजी वेन्चर्स प्रोग्राम की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। कभी-कभी जिसे हम खराब आइडिया कहते हैं, उसी में सबसे ज्यादा संभावना होती है।

टीना ने इस सिलसिले में खासा काम किया है। वह एक मिसाल देती हैं। एक टीम को उन्होंने दो हिस्सों में बांट दिया था। पहली टीम को कहा था कि हर कोई अपने बेहतरीन आइडिया के साथ पेश हो। दूसरी टीम से कहा था कि हर कोई अपना बेहतरीन आइडिया तो पेश करे, लेकिन उसकी नजर में जो सबसे बुरा हो उसे भी सामने रखे यानी अपने सबसे अच्छे और सबसे बुरे आइडिया को एक साथ पेश करे।

उन्होंने पाया था कि जो टीम एक ही आइडिया पर काम कर रही थी, वह कुछ कम क्रिएटिव थी। और जिनको दोनों तरह के आइडिया पर काम करने को कहा था, वह ज्यादा क्रिएटिव थी। मजेदार बात यह थी कि आमतौर पर जिन्हें खराब आइडिया कहा जाता है, वह भी खराब नहीं निकले।

अक्सर होता यह है कि हम जिसे खराब आइडिया कहते हैं, उसकी वजह कुछ और होती है। थोड़े से मुश्किल आइडिया को लेकर लोग परेशान होने लगते हैं। सो, कहना शुरू हो जाता है कि यह तो नहीं चलेगा। लेकिन कभी-कभी वही आइडिया बेहतरीन होता है। वह नया होता है। असल में मशक्कत करनी पड़ेगी, इसीलिए वह खराब या अव्यावहारिक साबित कर दिया जाता है। सो, खराब आइडिया भी कायदे से देखा जाना चाहिए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ये तो नहीं चलेगा