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उड़ीसा तट से ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण

उड़ीसा तट से ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण

भारत ने रविवार को उड़ीसा तट के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण केन्द्र (आईटीआर) से 290 किलोमीटर रेंज की ब्रहमोस क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया। रक्षा बलों द्वारा इसकी क्षमताओं को दुरूस्त करने के परीक्षणों के तहत यह परीक्षण किया गया है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक अधिकारी ने सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर आईटीआर के परिसर तीन से मिसाइल को प्रक्षेपित किए जाने के तुरंत बाद बताया कि रक्षा बलों ने अपनी जांच परख के लिए इसका परीक्षण किया। ब्रहमोस दो से आतंकवादी शिविरों समेत बेहद सटीक लक्ष्यों को विशेष तौर पर निशाना बनाया जा सकता है। इस प्रकार के हमलों में लक्ष्यों के अतिरिक्त अन्य नुकसान नहीं होता।

यह मिसाइल ध्वनि की गति से 2.8 गुना अधिक तेजी से उड़ान भर सकती है और अपने साथ 300 किलोग्राम वजनी आयुध ले जाने में सक्षम है और 290 किलोमीटर तक निशाना साध सकती है। इसकी सटीकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह जमीनी लक्ष्य को दस मीटर की ऊंचाई तक से भेद सकती है।

हालांकि इस मिसाइल को बहुउद्देशीय प्लेटफार्म से प्रक्षेपित किया जा सकता है लेकिन अब ध्यान इसके हवा से प्रक्षेपण और पनडुब्बी से प्रक्षेपित किए जाने वाले संस्करणों पर केन्द्रित किया जा रहा है। रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित ब्रहमोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसका प्रक्षेपण पनडुब्बी, पोत, विमान या जमीन आधारित मोबाइल आटोनोमस लांचर्स से भी किया जा सकता है।

ब्रहमोस का एक बेड़ा पहले से ही सेना में कार्यात्मक रूप में शामिल हो चुका है जिसमें 67 मिसाइलें, पांच मोबाइल आटोनोमस लांचर्स तथा अन्य उपकरणों के साथ ही दो मोबाइल कमांड पोस्ट भी शामिल हैं।

इसी प्रकार, नौसेना ने भी ब्रहमोस मिसाइल प्रणाली के पहले संस्करण को वर्ष 2005 से ही अपने सभी अग्रिम पंक्ति के युद्ध पोतों में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर रखी है। रक्षा सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उधर, सेना भी ब्रहमोस ब्लाक दो की दो और रेजीमेंटों को शामिल करने वाली है जिसे लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (एलएसीएम) के नाम से जाना जाता है। इस मिसाइल को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि यह घनी शहरी आबादी में भी छोटे लक्ष्यों को सटीकता से भेदने में सक्षम है।

ब्रहमोस मिसाइल एक दो चरणीय वाहन है जिसमें ठोस प्रोपेलेंट बूस्टर तथा एक तरल प्रोपेलेंट रैम जैम सिस्टम है। ब्रहमोस का पहला परीक्षण 12 जून 2001 को आईटीआर चांदीपुर से ही किया गया था और तथा इसके नौसैन्य संस्करण का अंतिम सफल परीक्षण 21 मार्च 2010 को उड़ीसा तट पर भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस रणवीर से किया गया था।

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