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आईपीएस पर भारी नौकरी, सात साल में 80 छोड़ चले

आईपीएस पर भारी नौकरी, सात साल में 80 छोड़ चले

भारतीय पुलिस सेवा के लगभग 80 अधिकारी पिछले सात साल के दौरान नौकरी छोडकर चले गये। सेवा में असमानता, मनचाहा कैडर आवंटन न होना, नौकरी की चुनौती भरी प्रकृति, देर से प्रोन्नति और निजी क्षेत्र में आकर्षक वेतन जैसे कुछ कारणों से कई आईपीएस अधिकारियों ने कॅरियर के बीच में ही नौकरी छोड़ दी।

सात पुलिस अधिकारियों ने 2007 में नौकरी छोडी़, 2004 में 11, 2005 में आठ, 2006 में 13, 2008 में 15 और 2009 में आठ अधिकारियों ने नौकरी छोड़ दी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पूर्व महानिदेशक और 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी एमएल कुमावत ने कहा कि गड़बडी़ वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक तैनाती भी आईपीएस अधिकारियों के नौकरी छोड़ने की प्रमुख वजह है।

कुमावत ने कहा कि सेवा की शर्ते सुधारी जानी चाहिए। आईपीएस अधिकारी अपने पूरे कॅरियर के दौरान फील्ड में रहते हैं। उन्हें इसका कुछ लाभ मिलना चाहिए अन्यथा नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति बनी रहेगी।

गृहमंत्री पी चिदंबरम कह चुके हैं कि अधिकांश राज्य कैडरों में पुलिस अधीक्षक स्तर के आईपीएस अधिकारियों की कमी को देखते हुए तय किया गया कि आईपीएस का वार्षिक बैच आकार 130 से बढा़कर डेढ़ सौ किया जाएगा। केन्द्र के स्तर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के 26 पदों में से 16 रिक्त हैं क्योंकि कई अधिकारी या तो रिटायर हो गये या उन्हें प्रमोशन मिल गया।

अधिकारियों की संख्या बढा़ने के लिए 1977 बैच के 61 आईपीएस अधिकारियों और इससे पहले के बैच को 21 नवंबर 2009 को एडीजीपी स्तर के पदों के पैनल में डाला गया। केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों में जवानों के मामले में भी यही स्थिति है। 2010 में 30 जून तक 9000 से अधिक कर्मी नौकरी छोड़कर चले गये। कुछ को घरेलू दिक्कत थी तो कुछ सुदूरवर्ती इलाकों में तैनाती से परेशान थे।

सबसे अधिक 3522 जवान केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) छोड़कर गये। इसके बाद 3000 जवान बीएसएफ से गये। 1417 जवान केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को छोड़कर गये। कुल मिलाकर छह अर्धसैनिक बलों में इस साल 30 जून तक 9036 लोग नौकरी छोड़कर गये।

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